अंकित गोरख की खास रिपोर्ट
एक तरफ जहां बच्चों के भविष्य को गढ़ने के लिए गांव का सरकारी स्कूल स्थापित है, वहीं दूसरी तरफ ठीक उसके पीछे कानून की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध रेत का साम्राज्य खड़ा किया जा रहा है। रायगढ़ के ग्राम धनागर में शासकीय विद्यालय के पीछे स्थित खुली खाली जमीन पर इन दिनों बड़े पैमाने पर अवैध रेत का भंडारण (डंपिंग) किया जा रहा है, जिसे बाद में ऊंचे दामों पर कालाबाजारी कर बेचा जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आसपास की नदियों और घाटों से दिन-रात अवैध उत्खनन कर ट्रैक्टरों और हाइवा के जरिए यहां रेत का डंप बनाया जा रहा है। जिस जगह पर बच्चों की खेलकूद और शैक्षणिक शांति होनी चाहिए, वहां दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही और धूल-धक्कड़ का माहौल बना हुआ है।
प्रशासनिक शह या संगठित लूट का खेल?
गांव में खुलेआम चल रहे इस अवैध कारोबार ने खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खनिज विभाग की चुप्पी: इतने बड़े पैमाने पर स्कूल जैसी संवेदनशील जगह के पीछे अवैध डंपिंग होना और अधिकारियों को भनक तक न लगना कई संदेहास्पद सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बिना खनिज विभाग और जिम्मेदार अफसरों की ‘सांठगांठ’ या मूक सहमति के इतना बड़ा काला कारोबार संचालित होना असंभव है।
संगठित रेत माफिया: यह केवल एक-दो गाड़ियों की चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह द्वारा खेला जा रहा ‘लूट का खेल’ है। उत्खनन से लेकर भंडारण और कालाबाजारी तक पूरा नेटवर्क बेखौफ होकर काम कर रहा है।
मासूमों की सुरक्षा और पर्यावरण पर मंडराता खतरा..
सरकारी स्कूल के ठीक पीछे भारी गाड़ियों की लगातार आवाजाही से न केवल स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है, बल्कि तेज रफ्तार वाहनों के कारण किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। इसके साथ ही, बिना किसी पर्यावरण अनुमति और रायल्टी चुकाए हो रहे इस उत्खनन से शासन को लाखों रुपये के राजस्व की चपत भी लग रही है।
















