रमेश शर्मा

50 सालों का सफर ख़बरों के साथ...✒️

रमेश शर्मा

50 सालों का सफर ख़बरों के साथ...✒️

Edit Template
हेडलाइन

पूर्वांचल की फिजां में जहर घोलने को जल्द ही खड़ी होंगी नई चिमनियां: 06 जुलाई को होगी सिंघल की जनसुनवाई..!!! क्या.. सिस्टम और पूंजीपतियों की फिर होगी जीत..??

अंकित गोरख की खास रिपोर्ट

अंकित गोरख की खास रिपोर्ट

कल फिर सिस्टम की आड़ लेकर पहनाई जाएगी पूर्वांचल को तरक्की की माला…

रायगढ़- 05 जुलाई, मेसर्स सिंघल स्टील एंड पावर लिमिटेड (पूर्व नाम- सिंघल एंटरप्राइजेस) की प्रस्तावित परियोजना को लेकर जनता में अंदरूनी आक्रोश तो पनप जरूर रहा है परंतु सिस्टम और पूर्णिपतियों के आगे सब नतमस्तक हैं।


आगामी 6 जुलाई 2026 को पतरापाली में होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई को पर्यावरणविदों ने ‘फर्जी और नियमों का मखौल’ बताते हुए इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की है.

सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने सीधे प्रशासन पर सवाल दागते हुए इस परियोजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और कई मुद्दे उठाए हैं:


कागजी बाजीगरी: जनसुनवाई जुलाई 2026 में है, लेकिन रिपोर्ट में 2 साल पुराने (2024 के) आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है, जो प्राकृतिक न्याय पर करारा प्रहार है.

आबादी पर वार: घनी आबादी मात्र 120 मीटर और बच्चों का स्कूल महज 160 मीटर की दूरी पर है, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य पूरी तरह तबाह हो जाएगा.


पर्यावरणीय डाका: हर दिन 10,830 KLD भूजल दोहन से क्षेत्र डार्क जोन बनेगा और सालाना 2.65 लाख टन से अधिक फ्लाई एश का जहर हवा में घुलेगा.

दागदार इतिहास: कंपनी पर पहले ही नियमों के उल्लंघन और फ्लाई एश कुप्रबंधन के कारण लाखों रुपयों का जुर्माना लग चुका है.
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस ‘कागजी और विनाशकारी’ जनसुनवाई को जबरन थोपा गया, तो इसके खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा.

पर्यावरण विभाग को दी गई पाती….

Advertisement

error: Content is protected !!