
भारतीय अध्यात्म और अघोर पंथ के इतिहास में परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी और उनके प्रिय शिष्य पूज्य गुरुदेव संत श्री प्रियदर्शी राम जी की गुरु-शिष्य परंपरा एक ऐसा उदाहरण है, जिसने समाज को सेवा, करुणा और निश्छल भक्ति की नई राह दिखाई।
परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी: युगद्रष्टा संत
परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी केवल एक साधक नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा संत थे। उन्होंने अघोर परंपरा को गुफाओं, जंगलों और श्मशानों की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज कल्याण के धरातल पर स्थापित किया। उनका दृढ विश्वास था कि अघोर का अर्थ भय या तंत्र-मंत्र नहीं, बल्कि अति सरल, निश्छल और निर्भय होना है।
भगवान राम जी ने अपना संपूर्ण जीवन कुष्ठ रोगियों, शोषितों, अनाथों और पीड़ितों के उद्धार में लगा दिया। उन्होंने समाज में फैली रूढ़ियों, भेदभाव और आडंबरों पर प्रहार करते हुए मानव-सेवा को ही ईश्वर की सबसे बड़ी आराधना बताया। उनकी छत्रछाया में अनगिनत साधकों ने अध्यात्म का सच्चा अर्थ सीखा।

पूज्य संत श्री प्रियदर्शी राम जी: सेवा और साधना के पर्याय
भगवान राम जी की इसी पावन परंपरा और विचारों के सबसे प्रिय एवं अनन्य ध्वजवाहक बने पूज्य संत श्री प्रियदर्शी राम जी। गुरुदेव प्रियदर्शी राम जी ने अपने गुरु के विचारों को केवल अपनाया ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन के हर एक क्षण में जिया।
गुरुदेव प्रियदर्शी राम जी का जीवन निष्काम कर्मयोग, अगाध तप और अत्यंत सहजता की मिसाल है। उन्होंने गुरु आदेश को सर्वोपरि मानते हुए अपना जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनकी सौम्य वाणी, सरल जीवनशैली और असीम करुणा हर किसी के दिल को छू लेती है। गुरु के प्रति निष्ठा और समर्पण कैसा होना चाहिए, इसका जीवंत प्रमाण पूज्य प्रियदर्शी राम जी का जीवन है।

बनोरा आश्रम: साधना और लोक-कल्याण का केंद्र
परमपूज्य गुरुदेव की इसी पावन प्रेरणा का प्रतिरूप है ‘अघोर गुरुपीठ बनोरा आश्रम’ (रायगढ़)। यह आश्रम आज शिक्षा, स्वास्थ्य, असहायों की सेवा और पर्यावरण संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु को अलौकिक शांति और सेवा भाव की अनुभूति होती है।
राजकाज न्यूज परिवार की ओर सादर चरण वंदन
सत्य, निष्ठा और समाज सेवा के जिस मार्ग पर ‘राजकाज न्यूज’ अग्रसर है, उस पथ पर चलने की शक्ति और प्रेरणा हमें पूज्य गुरुदेव की असीम कृपा से ही प्राप्त हुई है।
राजकाज न्यूज परिवार की ओर से पूज्य गुरुदेव संत श्री प्रियदर्शी राम जी एवं परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के श्री चरणों में कोटि-कोटि चरण वंदन एवं अभिनंदन।
नितेश शर्मा की कलम से…















