रायगढ़ 03 फरवरी 2026,- आज की डिजिटल जीवनशैली और घंटों स्क्रीन के सामने बैठने की मजबूरी ने इंसान को ‘गतिहीन’ बना दिया है। इस संकट के बीच, 22 वर्षों के अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सुजीत दास ने फिजियोथेरेपी को आधुनिक युग की अनिवार्य आवश्यकता बताया है। उनका मानना है कि आने वाले समय में सर्जरी और भारी दवाओं से बचने का एकमात्र सुरक्षित मार्ग फिजियोथेरेपी ही है।

डॉ. सुजीत दास का विशेष संदेश: “अपनी रीढ़ की हड्डी का सम्मान करें”
डॉ. दास ने अपने संदेश में विशेष रूप से युवाओं और कामकाजी पेशेवरों को सचेत किया है:
“हमारा शरीर हिलने-डुलने के लिए बना है, न कि स्थिर रहने के लिए। आज ‘सिटिंग’ (बैठना) नई ‘स्मोकिंग’ बन चुकी है। फिजियोथेरेपी सिर्फ टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के बाद की कसरत नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर की मशीनरी को सुचारू रूप से चलाने वाला ईंधन है। यदि आप आज व्यायाम के लिए समय नहीं निकालेंगे, तो कल बीमारी के लिए समय निकालना ही पड़ेगा।”
फिजियोथेरेपी में आए बड़े बदलाव और नई तकनीकें
डॉ. दास के अनुसार, फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में अब केवल पारंपरिक व्यायाम नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक का अद्भुत मेल हो चुका है:
न्यूरो-रिहैबिलिटेशन (Neuro-Rehab): अब लकवा (Stroke) और पार्किंसंस जैसे रोगों में फिजियोथेरेपी के जरिए मस्तिष्क की कोशिकाओं को ‘री-ट्रेन’ किया जा रहा है, जिससे मरीज फिर से चलने-फिरने में सक्षम हो रहे हैं।
शॉकवेव थेरेपी: पुराने से पुराने एड़ी के दर्द या कंधे के दर्द (Frozen Shoulder) के लिए अब बिना चीरा-फाड़ी वाली शॉकवेव तकनीक का उपयोग सफल साबित हो रहा है।
स्पोर्ट्स फिटनेस: डॉ. दास बताते हैं कि अब खिलाड़ी मैदान पर उतरने से पहले और बाद में अपनी मांसपेशियों की रिकवरी के लिए वैज्ञानिक फिजियोथेरेपी का सहारा लेते हैं, जिससे उनके करियर की उम्र बढ़ रही है।
आम लोगों के लिए डॉ. दास के 3 सुनहरे नियम….
पोस्चर ही पावर है: फोन इस्तेमाल करते समय या लैपटॉप पर काम करते समय अपनी गर्दन को झुकाने के बजाय उसे सीधा रखें।मांसपेशियों का संतुलन: केवल जिम जाकर भारी वजन उठाना ही स्वास्थ्य नहीं है, बल्कि मांसपेशियों में लचीलापन (Flexibility) होना असली फिटनेस है।
विशेषज्ञ की सलाह: इंटरनेट देखकर खुद से कसरत करने के बजाय हमेशा एक प्रमाणित फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लें, क्योंकि गलत व्यायाम फायदे की जगह नुकसान पहुँचा सकता है।
22 वर्षों का नैदानिक अनुभव डॉ. सुजीत दास को न केवल एक सफल डॉक्टर बनाता है, बल्कि उन्हें समाज का एक ऐसा शिक्षक भी बनाता है जो हमें हमारे शरीर की भाषा समझने में मदद करते हैं।















