
अंकित गोरख की खास रिपोर्ट..
रायगढ़। जिले की कमान संभालते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशिमोहन सिंह के कुशल मार्गदर्शन में अपराधियों और नशा तस्करों के खिलाफ चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन आघात’ पूरे शबाब पर है। एसएसपी सिंह की सख्त और पारदर्शी कार्यप्रणाली के कारण आज अपराधियों में खौफ का माहौल है, वहीं दूसरी ओर आम जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है।
जिले की पुलिस जिस मुस्तैदी से अवैध कारोबारियों की कमर तोड़ रही है, उसकी चारों तरफ जमकर सराहना हो रही है।
युवाओं की नसों में घुलता जहर: निचले मोहल्लों में नशीले इंजेक्शनों का खौफनाक कारोबार
कप्तान की इस बेहतरीन मुहिम के बीच, सजग नागरिकों ने शहर के कुछ अंदरूनी और निचले मोहल्लों की ओर भी पुलिस प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है। सूत्रों के मुताबिक, शहर के कुछ कोनों और निचले इलाकों में इन दिनों नशीले इंजेक्शनों और अन्य घातक नशीली गोलियों का कारोबार गुपचुप तरीके से पैर पसार रहा है।
बेहद चिंता की बात यह है कि कुछ सफेदपोश पैकार बाकायदा अपने घरों में बैठाकर युवाओं और मासूम बच्चों को यह जानलेवा नशा परोस रहे हैं। इस दलदल में फंसकर शहर की होनहार युवा पीढ़ी और स्कूली बच्चे तेजी से नशे की लत के शिकार हो रहे हैं, जिससे कई हंसते-खेलते परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।
बायपास के संदिग्ध ढाबे और गोदाम भी निशाने पर
मोहल्ला वासियों के अनुसार, एक ओर जहाँ अंदरूनी इलाकों में यह जहर बिक रहा है, वहीं दूसरी ओर बाबाधाम मार्ग पर ओवरब्रिज के आस-पास एवं अलग अलग बायपास सड़कों पर स्थित कुछ ढाबे, उनके पीछे बने गैरेज और सूने पड़े गोदाम भी असामाजिक तत्वों के छिपने और अवैध गतिविधियों के सुरक्षित ठिकाने बनते जा रहे हैं।
चूंकि जिले के कप्तान खुद हर छोटी-बड़ी आपराधिक गतिविधि पर सीधी नजर रख रहे हैं, इसलिए जनता को पूरा विश्वास है कि इन दोनों ही मोर्चों पर पुलिस का हंटर जरूर चलेगा।
सजग नागरिकों की एसएसपी से ‘गोपनीयता’ बनाए रखने की विनम्र गुहार
मोहल्ले की महिलाओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि एसएसपी शशिमोहन सिंह जी के रहते पुलिस हर सूचना पर तत्काल एक्शन ले रही है, जो बेहद काबिले तारीफ है।
हालांकि, स्थानीय लोगों ने सीधे जिले के कप्तान से एक बेहद संवेदनशील गुहार भी लगाई है। नागरिकों का कहना है कि निचले स्तर पर कुछ मामलों में कार्रवाई होने के बाद, स्थानीय आरोपियों को न जाने कैसे भनक लग जाती है कि शिकायत किसने की थी, जिससे बाद में वे शिकायतकर्ताओं को डराने-धमकाने का दुस्साहस करते हैं।
