कप्तान से जगी आस: क्या सच में शशि मोहन जी लगा पाएंगे नशे और सट्टे के ‘काले साम्राज्य’ पर लगाम…!!
सट्टेबाजों, नशे के सौदागरों और बुरे काम करने वालों के हुए बुरे दिन शुरू…!!!
रायगढ़ 07 फरवरी: जिले में नए एसएसपी के रूप में शशिमोहन जी के पदभार ग्रहण करते ही एक तरफ अपराधियों में हड़कंप है, तो वहीं आम जनता की नजरें अब उनकी कार्यशैली पर हैं। जिले में पैर पसार चुके नशे और सट्टे के अवैध कारोबार ने युवाओं की जड़ों को खोखला कर दिया है।
अब देखना यह है कि नए कप्तान इस ‘धीमे जहर’ से युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
बर्बाद होता बचपन, दांव पर भविष्य
पिछले कुछ वर्षों में सट्टे (ऑनलाइन और ऑफलाइन) और नशे के कारोबार ने शहर की गलियों से लेकर शिक्षण संस्थानों तक अपनी पहुंच बना ली है।
सट्टे का मायाजाल: रातों-रात अमीर बनने के लालच में युवा अपनी पढ़ाई के पैसे और मेहनत की कमाई लुटा रहे हैं।
नशे की गिरफ्त: ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों की कमोबेश हर गली मोहल्लों और नुक्कड़ पर पैडलर्स की आसान उपलब्धता ने किशोरों को अपराध की दुनिया की ओर धकेल दिया है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह जी के सामने प्रमुख चुनौतियां:
जानकारों का मानना है कि नए एसएसपी के लिए शहर के गली मोहल्लों में जड़ों तक फैले इस संगठित अपराध को जड़ से मिटाना एक बड़ी चुनौती होगी।
जनता को उनसे निम्नलिखित कार्यवाहियों की अपेक्षा है:
सक्रिय खुफिया तंत्र: सट्टे के मुख्य अड्डों और नशे के सौदागरों के नेटवर्क को ध्वस्त करना।
सख्त कानूनी कार्रवाई: पूरे महकमे के साथ ‘काले भेड़ियों’ पर नकेल कसना जो इन अपराधियों को संरक्षण देते हैं।
जागरूकता अभियान: पुलिस और जनता के बीच समन्वय बिठाकर युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना।
उम्मीद की नई किरण
शशि मोहन जी की छवि एक कड़क और ईमानदार अधिकारी की रही है। उनके आने के बाद जिस तरह से शहर में सट्टेबाजों,नशे के व्यापार और देह व्यापार के अवैध ठिकानों पर जिस तरह से ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ देखने को मिल रही है इससे शहरवासियों को उम्मीद है कि अब उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में होगा।

चलते चलते अंत में…
पुलिस की सख्ती और जनता का सहयोग ही इस बुराई को खत्म कर सकता है। अब गेंद एसएसपी शशि मोहन जी के पाले में है—क्या वे इस चुनौती को स्वीकार कर जिले को ‘नशा मुक्त और अपराध मुक्त’ बना पाएंगे?















