पत्थलगांव 21 मार्च (रमेश शर्मा)
जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक पूर्व मंत्री गणेश राम भगत की अगुवाई में छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों में डिलिस्टिंग की मांग को लेकर शुरू किया गया आंदोलन काफी तुल पकड़ चुका है। 24 मई 2026 को दिल्ली में प्रस्तावित बड़ी महारैली को सफल बनाने के लिए गांव गांव में आयोजित बैठकों में तेज तर्रार आदिवासी नेता गणेश राम भगत की मौजूदगी के बाद लोगों की भारी भीड़ पहुंच रही है।
जनजातीय सुरक्षा मंच की महत्वपूर्ण डिलिस्टिंग की मांग के समर्थन में आज छत्तीसगढ़ के युवा नेता एवं ग्राम पंचायत चंदागढ़ के सरपंच रोशन प्रताप सिंह ने आज गांव में महत्वपूर्ण बैठक क आयोजन किया था। इस बैठक में जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत, वरिष्ठ अधिवक्ता रामप्रकाश पांडेय, विशु शर्मा सहित प्रदेश के अनेक दिग्गज नेता पहुंचे थे।

इस कार्यक्रम में गणेश राम भगत ने स्पष्ट रूप से कहा कि मंच मुख्य रूप से उन अनुसूचित जनजाति के लोगों को ST सूची से हटाने की मांग करता है, जो धर्म परिवर्तन खासकर ईसाई या इस्लाम से जुड़ कर अपनी मूल जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और रीति-रिवाजों को छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग दोहरा लाभ आरक्षण + सरकारी योजनाएं ले रहे हैं, जबकि मूल जनजातीय समाज को कम हिस्सा मिल रहा है। इसको समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार को कानून बना कर रोक लगानी होगी।

जनजातीय मंच के युवा नेता रोशन प्रताप सिंह ने इस बैठक में कहा कि हम लोगों ने अपने समर्थकों को एकजुट कर आगामी रैली की समुचित तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए हाल के महीनों में मंच ने कई राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश,गुजरात, झारखंड, राजस्थान आदि में बैठकें, कार्यशालाएं और जिला-स्तरीय कार्यक्रम भी सफलता पूर्वक आयोजित किए हैं। अब हमारा मुख्य फोकस 24 मई 2026 को दिल्ली में प्रस्तावित बड़ी महारैली जनजातीय गर्जना महारैली पर है।
सरगुजा (छत्तीसगढ़) में ‘चलो दिल्ली अभियान’ की समीक्षा बैठक हुई, जहां गांव-गांव जनसंपर्क बढ़ाने और रैली को ऐतिहासिक बनाने पर जोर दिया गया।
अंबिकापुर सहित अन्य में बैठकें हुईं, जहां डिलिस्टिंग कानून के समर्थन में तैयारी तेज करने की बात हुई। 24 मई 2026 की रैली के लिए विस्तृत योजना बैठक हुई, जिसमें 5 लाख से अधिक जनजातीय लोगों के जुटने की पूरी संभावना है।उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों जैसे सुकमा, कांकेर, राजनांदगांव, कोरबा, में कार्यशालाएं और प्रेस कॉन्फ्रेंस हुईं, जहां रैली की रूपरेखा बनाई गई।
दिल्ली में भी हाल ही में लाल किले के पास बैठक हुई, जहां विभिन्न जनजातीय संगठनों के साथ संस्कृति संरक्षण और डिलिस्टिंग पर चर्चा हुई।
वरिष्ठ अधिवक्ता रामप्रकाश पांडेय जी बताया कि यह रैली रामलीला मैदान पर प्रस्तावित है, जहां देशभर की 705+ जनजातियों के प्रतिनिधि शामिल होने वाले हैं। मंच का उद्देश्य संवैधानिक संशोधन के जरिए डिलिस्टिंग कानून बनवाना है।
ग्राम पंचायत चंदागढ़ में लोगों ने अपनी एकजुटता को बरकरार रखते हुए इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प दोहराया।
















