
राजकाज हेल्थ अपडेट…अब हर मंगलवार को पढ़ें…स्वास्थ्य समाचार..अलग अलग विषयों पर…पिछले सप्ताह राजकाज ने फिजियोथैरेपी के फायदे बताए थे…इस अंक में आपके लिए प्रस्तुत है मधुमेह मुक्ति की राह आयुर्वेद के रास्ते…
रायगढ़ 09फरवरी, 2026 – आज के दौर में मधुमेह (Diabetes) एक महामारी का रूप ले चुका है। जहाँ दुनिया भर में लोग जीवन भर दवाइयाँ खाने को मजबूर हैं, वहीं जिला आयुर्वेद चिकित्सालय में पदस्थ डॉ. रविशंकर पटेल ने आयुर्वेद चिकित्सा एवं आहार विहार के माध्यम से शुगर को जड़ से ठीक करने और इसके दुष्प्रभावों को रोकने की एक नई उम्मीद जगाई है।
*दवाई एवं इंसुलिन की निर्भरता समाप्त करना है लक्ष्य*-
दवाई एवं कृत्रिम इन्सुलिन हार्मोन इंजेक्शन से रिपोर्ट सामान्य आ सकता है परंतु डायबिटीज और डायबिटीज से होने वाले अन्य सार्वदैहिक व्याधि कभी ठीक नहीं हो सकती यदि ठीक होती तो दवाई बंद करने से फिर से रिपोर्ट में शुगर बढ़ा हुआ नहीं आता। Type- 2 डायबिटीज का रिवर्सल तभी संभव है जब इसके मूल कारण इन्सुलिन रेजिस्टेंस दूर हो। इन्सुलिन रेजिस्टेंस होने के कारण की चिकित्सा करने से डायबिटीज के साथ रिपोर्ट भी स्वतः सामान्य आ जाते है।
डॉ. पटेल के उपचार के मुख्य बिंदु –
व्यक्तिपरक चिकित्सा – किसी भी व्याधि की चिकित्सा का निश्चित प्रोटोकॉल नही होता है प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में दोषों की अवस्थानुसार औषध का चयन कर की गई चिकित्सा से ही कोई भी व्याधि पूरी तरह रिवर्स होती है।
मेटाबॉलिज्म में सुधार: लक्षणों के आधार पर metabolism को प्रभावित करने वाले दोषों का निदान उपरांत उनके अनुरूप दीपन-पाचन, अनुलोमन इत्यादि चिकित्सा के द्वारा पाचन तंत्र को मजबूत करना ताकि इन्सुलिन रेजिस्टेंस दूर हो और शरीर की कोशिकाएं प्राकृतिक रूप से ग्लूकोज का उपयोग कर सके।
तनाव प्रबंधन: चूँकि शुगर का सीधा संबंध मानसिक तनाव से है, इसलिए योग और ध्यान को उपचार का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।
क्या शुगर पूरी तरह ठीक हो सकती है..??
डॉ. पटेल के अनुसार, Type-2 डायबिटीज पुरी तरह ‘रिवर्स’ किया जा सकता है। Type-2 डायबिटीज मुख्यतः इन्सुलिन रेजिस्टेंस के कारण होता है , अतः शुगर बढ़ने के मूल कारण इन्सुलिन रेजिस्टेंस को पथ्य आहार विहार एवं आयुर्वेदिक औषधियों से दूर करने पर डायबिटीज पूरी तरह से रिवर्स की जा सकती है।
Type -1 डायबिटीज में जहां इन्सुलिन का प्राकृतिक रूप से पैंक्रियाज के बीटा सेल से निर्माण नहीं होता है यहाँ पर भी बीटा सेल को उत्प्रेरित कर बाहरी कृत्रिम इन्सुलिन की मात्रा को कम करने का प्रयास किया जा सकता है ताकि कृत्रिम इन्सुलिन से होने वाले दुष्प्रभाव को कम किया जा सके। Type -1 डायबिटीज पर भी नियंत्रण हेतु प्रयास जारी है।
डॉ. पटेल की सलाह: शुगर के मरीजों के लिए 3 स्वर्ण नियम
आहार -कफ वर्धक एवं जलीय महाभूत युक्त आहार का त्याग: दूध,दही पनीर,मैदा, शक्कर इत्यादि
विहार -प्रतिदिन कम से कम 1 घंटा ब्रिस्क वाकिंग, योगाभ्यास,प्राणायाम,ध्यान
समय पर निद्रा- समय पर और पर्याप्त निद्रा सेवन से हार्मोन संतुलन से मेटाबॉलिज्म भी अच्छा होता है जिससे इन्सुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है।
Type-2 डायबिटीज के बारे में लोगों में यही धारणा है कि ये कभी ठीक नहीं हो सकती लेकिन ऐसा नहीं है, हां ये जरूर सही है कि डायबिटीज को डायबिटीज की तरह सोचकर चिकित्सा करने से कभी ठीक नहीं हो सकती परंतु डायबिटीज के मूल कारण की चिकित्सा करने से पूरी तरह से मधुमेह मुक्त जीवन पाया जा सकता है।
















