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हेडलाइन

मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात, सीमा विवाद पर हुई अहम चर्चा..


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आज शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर चीन के तियानजिन में द्विपक्षीय वार्ता की। इस मुलाकात को भारत और चीन के संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद से तनावपूर्ण बने हुए थे।


इस बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर बात की, जिसमें सबसे प्रमुख था सीमा विवाद।


बातचीत के मुख्य बिंदु:
सीमा विवाद का समाधान: दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्ष सीमा विवाद के “उचित, तर्कसंगत और आपसी सहमति से” समाधान पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
व्यापार और आर्थिक सहयोग: प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों ने वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में अपनी भूमिका को भी स्वीकार किया।
लोगों के बीच संबंध: दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी सहमति बनी, ताकि लोगों के बीच संपर्क और आपसी समझ बढ़ सके।
आतंकवाद पर चर्चा: खबरों के अनुसार, पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए चीन से भारत के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया।


इस मुलाकात के दौरान, शी जिनपिंग ने कहा कि “ड्रैगन और हाथी को एक साथ आना चाहिए।” उन्होंने भारत और चीन को विकास के भागीदार बताया, न कि प्रतिद्वंद्वी। वहीं, पीएम मोदी ने भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” पर जोर दिया और कहा कि दोनों देशों के संबंधों को किसी तीसरे देश के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।


यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों एशियाई शक्तियों के बीच यह सुलह वैश्विक भू-राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है।

Sco की बैठक

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