रमेश शर्मा

50 सालों का सफर ख़बरों के साथ...✒️

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हेडलाइन

भारत की परमाणु शक्ति में ऐतिहासिक उछाल: कलपक्कम के ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ ने रचा इतिहास..आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम..

भारत के लिए एक गर्व का क्षण। हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बहुत-बहुत बधाई।”- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली/कलपक्कम: भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के क्षेत्र में आज एक ऐसी सफलता हासिल की है, जो आने वाले दशकों में देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की तस्वीर बदल देगी। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित भारत के पहले स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने ‘क्रिटिकल’ होने (सफलतापूर्वक शुरू होने) की प्रक्रिया पूरी कर ली है।

यह उपलब्धि भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत का प्रतीक है।

वैज्ञानिकों की बड़ी जीत: जितना खर्च, उससे ज्यादा उत्पादन

इस रिएक्टर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘ब्रीडर’ (Breeder) तकनीक है। साधारण रिएक्टरों के विपरीत, यह परमाणु रिएक्टर जितना ईंधन खपत करता है, उससे कहीं अधिक ईंधन पैदा करता है। 500 मेगावाट की क्षमता वाला यह रिएक्टर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिसे इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) ने डिजाइन किया है।

थोरियम युग की ओर बढ़ते कदम

भारत के पास यूरेनियम का भंडार सीमित है, लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा थोरियम भंडार मौजूद है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दूसरे चरण (फास्ट ब्रीडर रिएक्टर) की सफलता के बिना तीसरे चरण में प्रवेश करना और थोरियम का उपयोग करना संभव नहीं था। आज की यह सफलता भारत को भविष्य में बिजली उत्पादन के मामले में पूरी तरह सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगी।

तकनीकी चुनौती और इंजीनियरिंग का लोहा

परमाणु विशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को संचालित करना दुनिया की सबसे जटिल तकनीकों में से एक है। इसमें कूलेंट के रूप में तरल सोडियम (Liquid Sodium) का उपयोग किया जाता है, जो अत्यधिक चुनौतीपूर्ण कार्य है। रूस के बाद भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बनने की राह पर है, जिसके पास व्यावसायिक रूप से संचालित होने वाला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर होगा।

देश ने दी वैज्ञानिकों को बधाई

इस गौरवशाली अवसर पर देश के नेतृत्व और वैज्ञानिक समुदाय ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) के इंजीनियरों को बधाई दी है। यह उपलब्धि न केवल भारत की इंजीनियरिंग शक्ति को दर्शाती है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी वैश्विक पटल पर मजबूती देती है।

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