
रायगढ़ 12 अप्रैल (रमेश शर्मा)
छत्तीसगढ़ में रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने औद्योगिक शहर में 20 मिनट की फिल्म ” खौफ द डिजिटल अरेस्ट” के माध्यम से कानून व्यवस्था और रचनात्मकता का एक अनोखा संगम पेश किया है।
इस के माध्यम से पुलिस महकमें के बीच आम जनता को साइबर क्राइम से बचने के लिए सजगता का संदेश कर्तव्यनिष्ठा के साथ सरल माध्यम से इस विषय को समझाने की कोशिश की गई है।
दर्शक भी इस फिल्म की खूब सराहना कर रहे हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में इस फिल्म पर जगह जगह चर्चा होने लगी है। दर्शकों का कहना है का जशपुरिहा इलाके की सत्य घटना पर आधारित फिल्म है, इसलिये बधाई का सिलसिला थमना नहीं चाहिए,और ताली बजना चाहिए ।
20 मिनट की फिल्म “खौफ द डिजिटल अरेस्ट” सच्ची घटना पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म है, जिसे जशपुर जिला पुलिस के सहयोग से बनाया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते खतरों के खिलाफ जनता को सचेत करना है।
दरअसल, आज साइबर फ्राड के खतरे से कोई भी अछूता नहीं है। आदिवासी बहुल जिलों में अपनी मेहनत की कमाई लुटाने की आए दिन घटनाएं सामने आ रही हैं। IPS पुलिस अधिकारी शशि मोहन सिंह ने इन्हीं सब पीड़ितों का दर्द को काफी नजदीक से देख कर यह प्रेरक फिल्म बनाई है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के संदेश का असर कैसा होता है इसका सुखद संयोग 6 अप्रैल को देखने को मिला जब छत्तीसगढ़ पुलिस ने फिल्म में दिखाए गए अपराध में शामिल असली अपराधियों को बेंगलुरु से गिरफ्तार कर लिया।
शशि मोहन सिंह IPS अधिकारी होने के साथ साथ एक कलाप्रेमी भी है, लेखन, कविता और अभिनय उनके धमनियों में बहता है। शशि मोहन सिंह ने इस फिल्म में एक मध्यमवर्गीय स्कूल मास्टर की भूमिका निभाई है।
फिल्म में बताया गया है कि कैसे उनकी बहन की शादी से ठीक एक महीने पहले उनका किरदार उत्पीड़न के “दुष्चक्र” में फंस जाता है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे साइबर अपराधी धमकी भरे फोन कॉल, धोखाधड़ी वाले वीडियो कॉल और ऑनलाइन भुगतान की मांग के जरिए एक आम आदमी का जीवन नर्क बना देते हैं, जिससे पीड़ित लाचारी और यहाँ तक कि आत्महत्या की ओर बढ़ जाता है।फिल्म का प्राथमिक उद्देश्य “डिजिटल अरेस्ट” के भ्रम को तोड़ना है।”भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई भी कानूनी प्रावधान नहीं है।”
यह कहानी जनता को यह समझाने में मदद करती है कि “जालसाज” नागरिकों को डराने-धमकाने के लिए किस तरह के हथकंडे अपनाते हैं।
इस फिल्म की महत्ता को छत्तीसगढ़ के प्रशासन ने भी समझा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया पर फिल्म को साझा करते हुए कहा कि “तकनीक ने जीवन आसान बनाया है, लेकिन साइबर धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ा दिया है।” जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है।”
फिल्म के प्रीमियर में मुख्यमंत्री की पत्नी कौशल्या देवी साय, छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम जिनका जशपुरिहा माटी से पुराना आत्मीय लगाव रहा है, यही उन्हें यंहा फिर खिंच लाया। इस दौरानअन्य गणमान्य दर्शक भी शामिल हुए।
शशि मोहन सिंह रचनात्मक कार्य के लिए पहले भी ख्याति प्राप्त कर चुके है। छत्तीसगढ़ के जेल परिसर के भीतर पनपते अपराध, वसूली के अलावा संगठित अपराध और आतंक को खत्म करने की दिशा में सराहनीय कार्य कर चुके है।

















