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छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए काली हल्दी की खेती: एक लाभदायक विश्लेषण…

छत्तीसगढ़ –  किसानों के लिए काली हल्दी (Curcuma caesia) की खेती एक आकर्षक और लाभदायक विकल्प बन सकती है। यह सामान्य हल्दी से अलग है और इसका उपयोग मुख्य रूप से आयुर्वेदिक और औषधीय उद्देश्यों के लिए होता है। इसकी बढ़ती मांग और उच्च बाजार मूल्य इसे पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक फायदेमंद बनाता है।

काली हल्दी की विशेषताएं और उपयोग- काली हल्दी का रंग अंदर से गहरा नीला या काला होता है। इसमें एक विशेष प्रकार का तेल और करक्यूमिन नामक यौगिक पाया जाता है, जो इसे औषधीय गुणों से भरपूर बनाता है। इसका उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है, जैसे कि पेट की समस्याएं, दर्द और सूजन। इसके अलावा, इसका इस्तेमाल सौंदर्य उत्पादों और धार्मिक अनुष्ठानों में भी होता है, जिससे इसकी बाजार में मांग हमेशा बनी रहती है।

खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां – काली हल्दी की खेती के लिए छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी काफी उपयुक्त है।

* जलवायु: इसे गर्म और नम जलवायु पसंद है।

* मिट्टी: यह अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी तरह बढ़ती है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस प्रकार की मिट्टी पाई जाती है।

खेती का तरीका: काली हल्दी की खेती का तरीका सामान्य हल्दी जैसा ही है।

* बुवाई: इसकी बुवाई आमतौर पर जून-जुलाई के महीनों में की जाती है।
* कटाई: फसल 8-9 महीनों में तैयार हो जाती है, जिसे फरवरी-मार्च में काटा जा सकता है।

* लाभ: इसकी खेती से किसान प्रति एकड़ 1.5 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। यह सामान्य हल्दी से लगभग तीन से चार गुना अधिक है।

किसानों के लिए सुझाव…!!!
* बाजार की जानकारी: किसान को फसल लगाने से पहले बाजार और खरीदारों की पूरी जानकारी जुटा लेनी चाहिए।
* संगठन बनाना: किसान समूह या सहकारी समितियां बनाकर अपनी फसल को सीधे बड़े खरीदारों और दवा कंपनियों को बेच सकते हैं, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिलेगा।
सरकारी सहायता: राज्य सरकार भी औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दे रही है, किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।

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