रायगढ़ – भगवान परशुराम जन्मोत्सव आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और इसी दिन अक्षय तृतीया का पावन संयोग भी बनता है। वर्ष 2026 में परशुराम जयंती रविवार, 19 अप्रैल को पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।
सत्तीगुड़ी स्थित भरतकूप महादेव मंदिर के पुजारी एवं विख्यात पंडित कमल शर्मा के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए इस दिन शाम का समय पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है आगे उन्होंने बताया कि..
भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वे महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे और उन्हें चिरंजीवी माना गया है। मान्यता है कि वे आज भी पृथ्वी पर तपस्या कर रहे हैं। पुराणों के अनुसार त्रेतायुग में जब हैहय वंश के राजा कार्तवीर्य अर्जुन सहित अन्य क्षत्रिय राजाओं का अत्याचार बढ़ गया था, तब धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार लिया। उन्होंने अपने पिता से वेद-शास्त्र और भगवान शिव से युद्ध कला सीखी। भगवान शिव ने ही उन्हें दिव्य परशु प्रदान किया, जिसके कारण उनका नाम परशुराम पड़ा।
कमल शर्मा ने बताया इस पर्व का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। माना जाता है कि भगवान परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को अधर्मी और अहंकारी क्षत्रियों से मुक्त कर धर्म की स्थापना की। वे जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय थे, इसलिए उनका जीवन ज्ञान और शक्ति के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। चूंकि यह पर्व अक्षय तृतीया के दिन पड़ता है, इसलिए इस दिन किया गया दान, जप और तप अक्षय फल देने वाला माना गया है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:49 बजे से प्रारंभ होकर 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 7:29 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा, जबकि प्रदोष काल शाम 6:49 बजे से रात 8:12 बजे तक सबसे शुभ माना गया है। सायंकालीन पूजा का समय रात 10:57 बजे तक रहेगा।
इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और भगवान परशुराम या भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। चंदन, अक्षत, फूल, तुलसी, धूप-दीप अर्पित कर मंत्र जाप किया जाता है तथा आरती के बाद भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर शोभा यात्राएं, भजन-कीर्तन और हवन का आयोजन भी किया जाता है। साथ ही जल से भरे घड़े, पंखे, अन्न, वस्त्र और छाते का दान करना शुभ माना जाता है।















