
अंकित गोरख की खास रिपोर्ट…
रायगढ़,05 अप्रैल – शहर की यातायात व्यवस्था अब ‘हादसों का निमंत्रण’ बनती जा रही है। इसका ताजा उद्धार तब देखने को मिला जब बीती रात सोनार पारा में एक 18 चक्का ट्रेलर घुस आया और कई दोपहिया चारपहिया वाहनों को खिलौनों की तरह बिखेर दिया और कुछ मकानों के चबूतरे भी तोड़ डाले..

आधी रात हुई इस घटना से मोहल्ले वासियों में सनसनी फैल गई…और ये कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि यातायात विभाग की घोर लापरवाही का नतीजा है इससे पहले भी लालटंकी की गली में जब ट्रेलर घुसा था, तब भी घंटों जाम और दहशत का माहौल रहा था।
स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कुछ दिन पहले ही लालटंकी की संकरी गली में भी इसी तरह एक भारी ट्रेलर घुस आया था, लेकिन उस घटना से भी यातायात विभाग ने कोई सबक नहीं सीखा।
हैरानी की बात है कि शहर के प्रतिबंधित और संकरे इलाकों में इन भारी वाहनों का प्रवेश बदस्तूर जारी है।
सवाल यह उठता है कि जब शहर के प्रवेश द्वारों पर भारी वाहनों की एंट्री वर्जित है, तो ये ‘लोहे के पहाड़’ शहर के बीचों-बीच कैसे पहुँच रहे हैं??क्या नाकों पर तैनात टीम सिर्फ वसूली के लिए है या सुरक्षा के लिए भी???

नगर कोतवाल ने संभाला मोर्चा…ट्रैफिक टीम ‘लापता’
एक बार फिर कोतवाली प्रभारी सुखनंदन पटेल और उनकी टीम ने अपनी तत्परता से मोहल्ले वालों के गुस्से को शांत किया और ट्रेलर को सुरक्षित बाहर निकाला। यदि पुलिस समय पर न पहुँचती, तो विवाद हो सकता था..!! वहीं दूसरी ओर, ट्रैफिक पुलिस की गैर-मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही।
एसी कमरों और गाड़ियों से बाहर सड़कों पर निकलने की जरूरत….
ट्रैफिक डीएसपी की तैनाती के बावजूद शहर की अंदरूनी सड़कों पर यातायात व्यवस्था पूरी ध्वस्त है जनता का आरोप है कि ट्रैफिक टीम केवल बाहरी इलाकों में वसूली करने में व्यस्त है।
ऑनलाइन चालान के नाम पर फोटो खींचने और सायरन बजाकर रसूख दिखाने तक सीमित है।
















