रायगढ़ 14 मार्च,स्वास्थ्य के क्षेत्र में रायगढ़ जिला नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। जहाँ एक ओर जटिल बीमारियों में आयुर्वेद का चमत्कार देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर शासन की ‘पैलिएटिव केयर’ (Palliative Care) योजना के माध्यम से डॉ. संतोष गुप्ता और उनकी टीम गंभीर मरीजों के द्वार तक पहुँचकर सेवा की नई इबारत लिख रही है।

केस स्टडी: सर्जरी के बाद भी जो दर्द कम न हुआ, उसे आयुर्वेद ने हरा दिया
हाल ही में कबीर चौक, रायगढ़ निवासी एक 42 वर्षीय व्यक्ति का मामला सामने आया है, जो नवंबर 2025 से जोड़ों के गंभीर दर्द और जकड़न से जूझ रहे थे। मेडिकल कॉलेज रायगढ़ और अन्य एलोपैथी विशेषज्ञों से इलाज के साथ-साथ उनके घुटने से ‘फ्लूइड एस्पिरेट’ (तरल पदार्थ निकालना) करने की सर्जरी भी की गई, लेकिन राहत नहीं मिली।
अंततः मरीज ने AAM रेंगालपाली के ओपीडी (OPD) में आयुर्वेदिक परामर्श लिया। मात्र 15 दिनों के नियमित उपचार और औषधियों के सेवन से मरीज के दर्द और जकड़न में चमत्कारिक सुधार हुआ है और अब वे अपने दैनिक कार्य सामान्य रूप से कर पा रहे हैं।

घर-घर सेवा: डॉ. संतोष गुप्ता और पैलिएटिव केयर की मानवीय पहल
चिकित्सा की इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, शासन की पैलिएटिव केयर योजना उन बुजुर्गों और मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है जो अस्पताल आने की स्थिति में नहीं हैं। डॉ. संतोष गुप्ता के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य टीम प्रति सप्ताह शनिवार को सीधे मरीजों के घर पहुँच रही है।
क्या है पैलिएटिव केयर…
होम-बेस्ड केयर: कैंसर, लकवा (Paralysis) और अंतिम चरण की बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों की घर जाकर देखभाल करना।
दर्द प्रबंधन: डॉ. गुप्ता बताते हैं कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य मरीज के असहनीय दर्द को कम करना और उनके जीवन को गरिमामय बनाना है।
इस योजना के माध्यम से शासन का लक्ष्य अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक गरिमामय स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना है

















