रमेश शर्मा

50 सालों का सफर ख़बरों के साथ...✒️

रमेश शर्मा

50 सालों का सफर ख़बरों के साथ...✒️

Edit Template
हेडलाइन

स्वस्थ मुस्कान, सुखी जीवन: डॉ. कुलकेश राठौर ने बताए दांतों की सुरक्षा के अचूक उपाय..

गर्मी के मौसम को देखते हुए हाइड्रेटेड रहें: उम्र के साथ लार कम बनती है, जिससे सड़न बढ़ती है। पर्याप्त पानी पिएं।


रायगढ़। बदलते खान-पान और जीवनशैली के कारण दांतों की समस्याएं अब हर उम्र के व्यक्ति के लिए चुनौती बन गई हैं।

शहर के प्रसिद्ध ऑर्थोडेंटिस्ट डॉ.कुलकेश राठौर ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए दांतों की सुरक्षा और सामान्य तकलीफों से बचने के महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं।

डॉ कुलकेश राठौर ऑर्थोडेंटिस्ट

बच्चों के लिए: मजबूत नींव, स्वस्थ दांत‘*
डॉ. राठौर के अनुसार, बच्चों में ‘नर्सिंग बॉटल कैविटी’ और चॉकलेट के अधिक सेवन से सड़न आम है।

ब्रश करने की आदत: जैसे ही पहला दांत आए,उसे साफ करना शुरू करें। 6 साल से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता की देखरेख में ब्रश करना चाहिए।
दूध की बोतल से सावधानी: सोते समय दूध की बोतल मुंह में न छोड़ें, क्योंकि इसमें मौजूद शुगर रात भर दांतों को नुकसान पहुँचाती है।

पिट और फिशर सीलेंट: डॉ. राठौर ने सुझाव दिया कि गहरे खांचों वाले दांतों में ‘सीलेंट’ लगवाएं ताकि सड़न की शुरुआत ही न हो।

युवाओं के लिए: ‘लापरवाही पड़ सकती है भारी’
युवाओं में अक्सर मसूड़ों की सूजन (Gingivitis) और टेढ़े-मेढ़े दांतों की समस्या देखी जाती है।

तंबाकू और स्मोकिंग से दूरी: यह न केवल दांतों को पीला करते हैं बल्कि ओरल कैंसर का मुख्य कारण भी हैं।


दांतों की सफाई (Scaling): साल में कम से कम एक बार प्रोफेशनल क्लीनिंग कराएं। यह धारणा गलत है कि सफाई से दांत ढीले होते हैं।

अकल दाढ़ (Wisdom Tooth): यदि पीछे के दांतों में दर्द हो, तो तुरंत एक्सरे कराएं, क्योंकि अकल दाढ़ अन्य दांतों को नुकसान पहुँचा सकती है।

बुजुर्गों के लिए: ‘तीसरी बत्तीसी की सुरक्षा’
बुजुर्गों में दांतों का गिरना, मसूड़ों का ढीला होना और सूखा मुंह (Dry Mouth) मुख्य समस्याएं हैं।

नकली दांतों (Dentures) की सफाई: यदि आप फिक्स या निकालने वाले दांत उपयोग करते हैं, तो उनकी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। रात में डेंचर को पानी में भिगोकर रखें।

*बीमारियों का प्रभाव:* शुगर (Diabetes) के मरीजों को मसूड़ों की बीमारी का खतरा अधिक होता है, इसलिए उन्हें हर 3 महीने में डेंटल चेकअप कराना चाहिए।

डॉ. राठौर का संदेश: “दांतों का दर्द केवल मुंह तक सीमित नहीं रहता, यह आपके हृदय और पाचन तंत्र को भी प्रभावित करता है। दर्द का इंतजार न करें, बल्कि हर छह महीने में जांच कराएं।”

Advertisement

error: Content is protected !!