दतिया – मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी दतिया में स्थित प्रसिद्ध माता पीतांबरा मंदिर में इन दिनों भक्तों का ताँता लगा हुआ है। नवरात्रि का पावन पर्व नजदीक आते ही, मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने भव्य महोत्सव की तैयारियाँ शुरू कर दी थी। देश-विदेश से श्रद्धालु यहाँ देवी पीतांबरा के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए पहुँच रहे हैं, जिन्हें बगलामुखी माई के नाम से भी जाना जाता है।

मंदिर का इतिहास और महत्व
पीतांबरा पीठ की स्थापना वर्ष 1920 के दशक में “श्री स्वामीजी महाराज” ने की थी। यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है, बल्कि इसका संबंध भारत के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं से भी रहा है। कहा जाता है कि 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान, यहाँ एक विशेष यज्ञ किया गया था, जिसके बाद युद्ध में भारत को विजय प्राप्त हुई थी। इसी कारण यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।

मंदिर परिसर में देवी धूमावती माई का भी एक अनूठा मंदिर है और दोनों शक्ति स्वरूपा भगवती के बीच में महाभारत कालीन शिव साक्षात् वनखण्डेश्वर के रूप में विराजमान है। ये शिवलिंग महाभारत कालीन माना जाता है,यह भी एक प्रमुख कारण है कि यहाँ साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
खिड़की से होते है मां के दर्शन
देवी मां पीतांबरा मंदिर में तंत्र साधना से निर्मित हरिद्रा कुंड भी है। देवी भक्तों को माता के दर्शन एक खिड़की से होते हैं। देवी मां पीतांबरा को स्तम्भन की देवी कहा जाता है। मां पीतांबरा शत्रु नाशिनी है। देवी मां पीतांबरा को राज राजेश्वरी सत्ता की देवी भी कहा जाता है। इसलिए राजनेता दतिया पीतांबरा मंदिर में पूजा अर्चना करने बड़ी संख्या में आते हैं।
नेहरू से लेकर अमित शाह और कई बड़ी हस्तियां आ चुकी हैं यहां..
दतिया की मां पीतांबरा को राज्यसत्ता की देवी ऐसे ही नहीं कहा जाता है। जहां भारत-चाइना युद्ध के समय पीएम जवाहर लाल नेहरू आ चुके हैं। वहीं, यहां गृहमंत्री अमित शाह, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, एमपी के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी दर्शन को पहुंच चुकी है। इसके अलावा बॉलीवुड के स्टार संजय दत्त और कई अन्य बड़ी हस्तियां यहां दर्शन को आते जाते रहते है।
दतिया का यह पीतांबरा मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यहाँ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है।













