जशपुर 15 सितंबर (रमेश शर्मा)
जशपुर वन मंडल में वन्य प्राणियों की देखरेख और सुरक्षा दे पाने में वन विभाग की विफलता से एक घायल चीतल को भागकर समीप स्थित ग्रामीण के घर में शरण लेनी पड़ी।
जशपुर वन मंडल के डीएफओ शशि कुमार के अवकाश पर होने के साथ बगीचा वन परिक्षेत्र में भी विभाग से अधिकारी नहीं है। वन अधिकारियों की कमी से जूझ रहे विभाग से वन कर्मियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यंहा के जंगलों में सतत देखरेख नहीं होने से जंगल के वन्य प्राणियों को शिकारियों से बचने की खातिर इधर उधर भटकते देखा जा रहा है।
जशपुर के वन मित्र रामप्रकाश पांडेय ने ऐसी स्थिति को देखकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
बगीचा वन परिक्षेत्र के ग्राम कुटमा में शिकारियों के चंगुल से बचने के बाद एक घायल चीतल भागता हुआ एक ग्रामीण के घर जा घुसा इस घायल चीतल की दयनीय स्थिति को देखकर ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग विभाग को सूचना दी, जिसके बाद उसे रेस्क्यू कर जंगल मे छोड़ दिया गया है।
दरअसल, जशपुर वन मंडल में पदस्थ डीएफओ शशि कुमार बीते क ई दिन से अवकाश पर हैं, उनका प्रभार सरगुजा के बलरामपुर डीएफओ आलोक बाजपेयी को दिया गया है। बलरामपुर डीएफओ भी यंहा नियमित नहीं रह पाने से वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग गया है।
बताया जा रहा है कि बगीचा वन परिक्षेत्र में भी वन अधिकारी नहीं हैं। इस वजह यंहा वन विभाग के आवश्यक कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।
यंहा का कुटमा गांव के समीप जंगल से घायल चीतल सुबह सुबह ही आश्रित ग्राम बैगाकोना में भटकते हुए देखा गया था।यह चीतल घायल अवस्था मे जंगल की ओर से बदहवास भागता हुआ टोंकाधर यादव के घर मे घुस आया था। जिसे सरपंच और ग्रामीण सभी ने पकड़ने के बाद वन विभाग को सूचना दे दी गई।
ग्रामीणों ने बताया इन सबमें विचित्र बात यह रही कि वन विभाग के सम्बंधित कर्मचारी पहुंचे, और चीतल जिसके मुह से घायल जहां से खून निकल रहा था, उसे वैसे ही छोड़ दिया, मतलब कि बिना प्राथमिक चिकित्सा के ही, जिसको लेकर लोग यह आशंकित है कि इस प्रकार घायल अवस्था मे ही चीतल को जंगल छोड़ देने से कितने दिन सर्वाइव कर पायेगा..??

















