नई दिल्ली: अगर आप मर्सिडीज-बेंज की लग्जरी कार खरीदने का मन बना रहे हैं और कीमतों में गिरावट का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए निराशाजनक हो सकती है। मर्सिडीज-बेंज के वैश्विक सीईओ ओला कैलेनियस और भारत में कंपनी के प्रमुख संतोष अय्यर ने स्पष्ट कर दिया है कि निकट भविष्य में कारों की कीमतों में कमी की कोई संभावना नहीं है। इसके विपरीत, कंपनी 2026 में कीमतों में चरणबद्ध तरीके से और बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है।
दाम न घटने के पीछे मुख्य कारण
कंपनी ने कीमतों में कटौती न करने के पीछे कई ठोस तर्क दिए हैं:
- रुपये की कमजोरी: यूरो के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में लगातार गिरावट आ रही है। मर्सिडीज-बेंज इंडिया के सीईओ संतोष अय्यर के अनुसार, “रुपये की कमजोरी और इनपुट लागत के बीच 10-15% का अंतर आ चुका है, जिसे पाटना आवश्यक है।”
- लॉजिस्टिक्स और कच्चा माल: वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन की लागत और कच्चे माल (स्टील, एल्युमीनियम और चिप्स) की कीमतों में स्थिरता न होना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- महंगाई का दबाव: परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसे कंपनी अब और अधिक वहन करने की स्थिति में नहीं है।
2026 में ‘प्राइस हाइक’ का रोडमैप
मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने 1 जनवरी 2026 से अपनी पूरी रेंज की कीमतों में 2% तक की बढ़ोतरी पहले ही लागू कर दी है। इसके अलावा, कंपनी अब साल की हर तिमाही (Quarterly) में कीमतों की समीक्षा करने और उनमें लगभग 2% की वृद्धि करने पर विचार कर रही है।
“हम ग्राहकों पर एक साथ बड़ा बोझ नहीं डालना चाहते, इसलिए हम चरणबद्ध तरीके से (Phased Manner) कीमतों में सुधार कर रहे हैं ताकि बाजार की मांग पर नकारात्मक असर न पड़े।” – संतोष अय्यर, MD & CEO, मर्सिडीज-बेंज इंडिया
भारत-यूरोपीय संघ (EU) ट्रेड डील का क्या होगा असर?
हाल ही में चर्चा में रहे भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर भी कंपनी ने रुख साफ किया है। मर्सिडीज का कहना है कि उनकी 90% से ज्यादा बिक्री ‘मेड इन इंडिया’ (भारत में असेंबल) मॉडलों की होती है। केवल 5% मॉडल ही पूरी तरह से आयात (CBU) होते हैं। ऐसे में ट्रेड डील के बाद भी लग्जरी कारों की कीमतों में तत्काल या बड़े बदलाव की उम्मीद कम है।















