हत्या के दो माह बाद सकुशल वापस लौटा युवक…तो फिर मृतक कौन…??? हत्या के आरोप में चार आरोपियों का क्या..??
पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर लगा सवालिया निशान..??…!!!
जशपुर 22 दिसम्बर (रमेश शर्मा)
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सीटोंगा गांव का एक मृत युवक दो महीने के बाद सकुशल जिन्दा वापस लौट आने से पूरे प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज पर सवालिया निशान लगा दिया है।
दरअसल यह आश्चर्यचकित करने का मामला इसलिए भी जनचर्चा का विषय बन गया है क्योंकि सिटोंगा गांव का मृत युवक सिमित खाखा के परिवारजनों ने एक जली हुई अवस्था में मिले शव को सिमित खाखा के रूप में पहचान करना बताया था ।

जले हुए मृतक युवक की पहचान करना उसके परिजनों के लिए भले कठिन हो सकता है लेकिन हत्या जैसे गंभीर अपराध की जांच में जुटी पुलिस की टीम भी धोखा खा गाई , जशपुर पुलिस की टीम ने जले हुए शव की पहचान को शत-प्रतिशत सही मान लिया। जिसके बाद पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के बाद आनन-फानन में जघन्य हत्या कांड में चार आरोपियों को भी बगैर डीएनए टेस्ट के ही ढूंढ निकाला। पुलिस का कहना है कि इन सभी आरोपियों ने हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया था, और इस सनसनीखेज मामले की पूरी पटकथा बता कर घटनास्थल और सभी तथ्यों को प्रस्तुत कर दिया। इसी वजह चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
अब…सीटोंगा गांव का सिमित खाखा नामक इस मृत युवक के जिंदा वापस लौट आने से सबसे अधिक उसकी पत्नी, भाई तथा परिवार के अन्य लोग सबसे अधिक हतप्रभ हैं, जिन्होंने सबसे पहले सिमित खाखा की पुख्ता पहचान की थी। इसके बाद जशपुर पुलिस ने भी तत्काल हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
यंहा आश्चर्य की बात यह है कि परिवारजनों को जली हुई अवस्था में शव की पहचान करना भले कठिन हो सकता है लेकिन हत्या जैसे गंभीर अपराध की जांच में जुटी पुलिस की टीम ने आनन-फानन में चार आरोपियों को भी ढ़ूड़ निकाला। इन सभी आरोपियों ने हत्या की सनसनीखेज पटकथा बता कर घटनास्थल और सभी तथ्यों को प्रस्तुत कर दिया।

पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह का कहना है कि पुलिस टीम ने अपनी जांच की कार्रवाई को विधिसम्मत आगे बढ़ाते हुए आरोपियों के निष्पक्ष मजिस्ट्रेट बयान करा कर हत्या के चारों आरोपियों को जेल भेज दिया। इस प्रक्रिया के दौरान आरोपियों के समक्ष पुलिस टीम को अलग रखना होता है। इसी आधार पर पुलिस ने किसी भी चूक की बात से अपना पल्ला भी झाड़ लिया है।
इस दिलचस्प घटना में लगभग दो माह बाद अविश्वसनीय और पेचीदा मोड़ उस समय आ गया जब कथित मृतक युवक सिमित खाखा सही सलामत अपने गांव लौट आया। फिल्मी दुनिया की कहानी की तरह यह घटना अब जशपुर जिले के साथ पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
नार्को टेस्ट से ली जा सकती है मदद..
पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह का कहना है इस मामले में पुलिस ने कहीं भी चूक नहीं की है। इसलिए हत्या के अपराध में जेल में बंद चारों आरोपियों को रिमांड पर लेकर फिर से जांच शुरू कराई जा रही है। शशि मोहन सिंह का कहना है इस मामले में यदि आवश्यक हुआ तो नार्को टेस्ट भी कराया जा सकता है।
फिलहाल जशपुर पुलिस अधीक्षक ने पड़ोसी राज्य झारखंड और ओड़िशा की पुलिस से भी सम्पर्क कर वंहा गुमशुदा के मामलों को खंगाला जा रहा है। शशि मोहन सिंह का कहना है कि इस पेचीदा मामला को भी जल्दी ही सुलझा लिया जाएगा।















