
रायगढ़ 09 मई – रायगढ़ की माटी के लाल दिव्यांशु देवांगन ने कायरो (मिस्र) में आयोजित जूनियर 10 मीटर राइफल शूटिंग में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। मूलतः सारंगढ़ के पैतृक निवासी और वर्तमान में बोईरदादर (रायगढ़) निवासी दिव्यांशु की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि बचपन के जुनून से विश्व पटल तक के सफर की एक रोमांचक दास्तां है।

संगीत की शिक्षा से ‘शार्प शूटर’ बनने तक का सफर
दिव्यांशु का बचपन चक्रधर कला एवं संगीत महाविद्यालय (जिसका संचालन उनके नाना परिवार द्वारा किया जाता है) के कलात्मक माहौल में बीता। महज 5 साल की उम्र में उन्होंने कला गुरु स्व. वेदमणि सिंह ठाकुर से शास्त्रीय गायन सीखना शुरू किया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। तीन साल बाद संगीत की जगह खेल के प्रति उनकी रुचि जागी।

मीना बाजार के गुब्बारों से शुरू हुआ निशाना
बचपन में जन्माष्टमी के मेलों में नाना के साथ मीना बाजार जाकर गुब्बारों पर सटीक निशाना लगाना दिव्यांशु का सबसे प्रिय शौक था। खिलौना बंदूकों के प्रति उनका यह प्रेम तब एक प्रोफेशनल मोड़ पर आया, जब उनकी माँ (श्रीमती यामिनी देवांगन, शिक्षिका-केवीएस रायगढ़) उन्हें राजस्थान के सरदार शहर ले गईं। वहाँ एक वर्कशॉप के दौरान कोच ने तीसरे ही दिन उनकी अद्भुत प्रतिभा को पहचान लिया।

कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास
प्रारंभिक शिक्षा: 13 साल की उम्र में महाराणा प्रताप स्कूल, राजस्थान से शूटिंग की बारीकियां सीखीं।
कोरोना काल का संघर्ष: लॉकडाउन में रायगढ़ लौटने पर भी दिव्यांशु रुके नहीं, घर पर ही रोजाना 2 घंटे का कड़ा अभ्यास (होल्डिंग प्रैक्टिस) जारी रखा।
उच्च स्तरीय प्रशिक्षण: दिल्ली की ‘एनिमेन्स शूटिंग एकेडमी’ में कोच श्री भवानी हाईबुरु के मार्गदर्शन में नियमित ट्रेनिंग ली।
















