रमेश शर्मा

50 सालों का सफर ख़बरों के साथ...✒️

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हेडलाइन

त्योहारों में ट्रैफिक का इम्तिहान..!! क्या जाम से निपटने तैयार है..शहर का यातायात अमला..???



दुर्गा पंडालों में उमड़ने वाली भीड़, दुकानों का सामान सड़क तक सजना और वाहनों का दबाव बढ़ा सकता है मुश्किलें;

वन-वे रूट प्लान और यातायात पुलिस की सक्रियता पर टिकी निगाहें..!!


त्योहारों की रौनक के बीच शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने की आशंका है। दुर्गा पंडालों में दर्शन के लिए उमड़ने वाली भीड़, दुकानों का सामान सड़क तक सजना और दोपहिया-चारपहिया वाहनों की आवाजाही ने यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यातायात पुलिस समय रहते मोर्चा संभालेगी या लोगों को जाम की आशंका के बीच ही अपनी राह तलाशनी पड़ेगी?



अगले कुछ दिन शहर की यातायात व्यवस्था के लिहाज से अहम हो सकते हैं। भीड़भाड़ वाले मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, वन-वे रूट प्लान, व्यवस्थित पार्किंग और सड़क पर अतिक्रमण की निगरानी जैसे कदम उठाए जाते हैं या नहीं, इस पर लोगों की नजर रहेगी।



हालांकि, यातायात अव्यवस्था के लिए केवल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना भी पूरी तस्वीर नहीं है। जाम लगने के दौरान कई दोपहिया चालक रॉन्ग साइड से निकलने की कोशिश करते हैं और आगे जाकर सड़क के बीच अपनी बाइक या स्कूटी खड़ी कर देते हैं। इससे रास्ता और संकरा हो जाता है और पहले से लगा जाम और बढ़ जाता है। गलत दिशा में वाहन चलाना, सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग करना और थोड़ी दूरी के लिए भी नियमों की अनदेखी करना यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डालता है। ऐसे में आम जनता की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है कि वह धैर्य रखे, रॉन्ग साइड से वाहन न चलाए और निर्धारित पार्किंग व यातायात नियमों का पालन करे।



सोशल मीडिया पर भी यातायात व्यवस्था को लेकर चर्चाएं शुरू होने की बात सामने आ रही है। लोगों की चिंता साफ है—त्योहार का आनंद जाम और अव्यवस्था की भेंट न चढ़ जाए। हालांकि, यातायात पुलिस की ओर से किसी विशेष रूट प्लान या कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि के बिना यह कहना जल्दबाजी होगी कि व्यवस्था कैसी रहेगी।

अब जरूरत है समय रहते ठोस तैयारी की, ताकि श्रद्धालुओं को पंडालों तक पहुंचने और आम नागरिकों को अपने गंतव्य तक जाने में अनावश्यक परेशानी न हो। प्रशासन के साथ नागरिकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। सवाल सीधा है—क्या यातायात विभाग पहले से तैयारी करेगा और क्या आम लोग भी नियमों का पालन कर सहयोग देंगे, या हालात बिगड़ने के बाद ही व्यवस्था संभालने की कवायद शुरू होगी…???

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