पत्थलगांव 25 दिसम्बर (रमेश शर्मा)
पत्थलगांव को जिला बनाने का मामला पर सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक गोमती साय के बैकफुट पर आ जाने से इलाके के लोगों को जबरदस्त धक्का लगा है। हालांकि गोमती साय ने नया जिला गठन के मामले में मात्र एक विधानसभा का क्षेत्र को लेकर तकनीकी दिक्कत का हवाला दिया है लेकिन पत्थलगांव को जिला बनाने को लेकर चार दशक से बेसब्री से इंतज़ार कर रहे लोगों में अब आक्रोश दिखाई देने लगा है। यंहा कभी कांग्रेस नेतृत्व तो कभी भाजपा की अनदेखी से पत्थलगांव क्षेत्र के लोगों का सपना आज भी अधर में लटका हुआ है।
विधायक गोमती साय को करीब से जानने वालों का साफ कहना है कि उन्होंने पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. दिलीप सिंह जूदेव से राजनीतिक गुरुमंत्र लेने के बाद जीवन में कभी भी झूठे वायदे अथवा छलफरेब को जगह नहीं दी। अपने जीवन का कठिन समय में भी गोमती साय ने अपनी माता स्व. श्रीमती बसंती पैंकरा की शिक्षा-दीक्षा को याद कर सच्चाई की डगर पर दृढ़ता से अडिग खड़ी रहीं हैं लेकिन इस वक्त गोमती साय व्दारा पत्थलगांव की पालक होने के बाद भी इस तरह बैकफुट पर चला जाना किसी की समझ में नहीं आ रहा है।
हालांकि यह तय है पत्थलगांव को जिला बनाने का मुद्दा अब लाखों लोगों की जनभावना में बस गया है। इस मुद्दे से अनदेखी कर कोई भी राजनीतिक दल यहां अपनी सफलता का झंडा गाड़ पाने की स्थिति में दिखाई नहीं दे रहा है।
पत्थलगांव के बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस अंचल को हमेशा ही राजनीतिक उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है। पत्थलगांव से रायगढ़ और पत्थलगांव से खरसिया की जानलेवा सड़क देख कर यंहा जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने ओड़िशा तथा झारखंड की सड़कों का सहारा लेना शुरू कर दिया था। लेकिन आज भाजपा की ट्रिपल इंजन की सरकार के बाद भी पत्थलगांव क्षेत्र की उपेक्षा यथावत जारी है।
इस वक्त पत्थलगांव विधानसभा का दुर्भाग्य ही कहना होगा, क्योंकि छत्तीसगढ़ के मुखिया विष्णु देव साय जी सौभाग्य से पत्थलगांव विधानसभा के ही मतदाता हैं। इसी नाते विष्णु देव साय जी ने पत्थलगांव क्षेत्र में सड़क स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों की खातिर कभी भेदभाव नहीं किया। सीएम विष्णु देव साय ने पत्थलगांव में एडिशनल कलेक्टर और एडिशनल एसपी का कार्यकाल खोलने की घोषणा महज हवा में ही तैर रही है। बेजाकब्जा का मामूली सा मसला को लेकर सत्ता पक्ष की विधायक रायमुनी भगत को कड़कड़ाती ठंड में धरना प्रदर्शन करने की नौबत से जशपुर जिले में प्रशासन की सच्चाई बेनकाब हो गई। ऐसे ही अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में उच्च पदस्थ प्रशासनिक अधिकारियों का निकम्मापन भी साफ दिखाई दे रहा है, दो साल का लम्बा समय के बाद भी यंहा सड़कों, चिकित्सा सेवाओं का कायाकल्प नहीं हो पाना काफी दुखद पहलू बन गया है।
ऐसे हालात में सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक गोमती साय को अपनी तेजतर्रार होने की पहचान को हर जटिल परिस्थितियों के बाद भी बचा कर रखना होगा।

















