अगस्त 2025 में गुरु बृहस्पति के राशि परिवर्तन का ज्योतिषीय प्रभाव: राशियों पर असर और उपाय
वाराणसी: ज्योतिष शास्त्र में गुरु बृहस्पति को ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य का कारक ग्रह माना जाता है। अगस्त 2025 में बृहस्पति का नक्षत्र परिवर्तन सभी 12 राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाला है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह गोचर शिक्षा, धन, करियर और पारिवारिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालेगा।
गुरु का नक्षत्र परिवर्तन: काशी विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पंडित श्री शत्रुघ्न त्रिपाठी के अनुसार, 13 अगस्त 2025 को गुरु बृहस्पति पुनर्वसु नक्षत्र के पहले चरण में प्रवेश करेंगे और 30 अगस्त को इसी नक्षत्र के दूसरे चरण में गोचर करेंगे। यह परिवर्तन मिथुन राशि में होगा, जहां गुरु पहले से ही विराजमान हैं। गुरु की यह चाल कुछ राशियों के लिए शुभ फलदायी होगी, जबकि अन्य के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
राशियों पर प्रभाव:
मेष: करियर में नए अवसर और आत्मविश्वास में वृद्धि। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।
वृषभ: आर्थिक स्थिति में सुधार, लेकिन अनावश्यक खर्च से बचें।
मिथुन: गजलक्ष्मी राजयोग के प्रभाव से धन लाभ और सामाजिक सम्मान की प्राप्ति।
कर्क: मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द में वृद्धि।
सिंह: नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी, नौकरी में तरक्की के योग।
कन्या: कार्यक्षेत्र में मेहनत का फल मिलेगा, सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
तुला: धार्मिक यात्राओं और आध्यात्मिक उन्नति का समय।
वृश्चिक: धैर्य रखें, निवेश में सावधानी बरतें।
धनु: गजलक्ष्मी राजयोग के कारण धन और करियर में उन्नति।
मकर: पैतृक संपत्ति से लाभ, माता के साथ संबंध मजबूत होंगे।
कुंभ: नई योजनाएं सफल होंगी, आर्थिक स्थिति में सुधार।
मीन: रचनात्मक कार्यों में रुचि, मानसिक शांति के लिए गणपति पूजा लाभकारी।
ज्योतिषीय महत्व और राजयोग: ज्योतिषाचार्य श्री शत्रुघ्न त्रिपाठी जी के अनुसार, गुरु और शुक्र की मिथुन राशि में युति से गजलक्ष्मी राजयोग बनेगा, जो 20 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। यह योग मिथुन, कर्क, तुला, धनु और मकर राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा, जिससे धन, समृद्धि और करियर में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे।
उपाय: गुरु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने और अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए ज्योतिषी निम्नलिखित उपाय सुझाते हैं: “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का नियमित जाप करें।
गुरुवार को पीले वस्त्र पहनें और केले का दान करें।
हनुमानजी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
महामृत्युंजय मंत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

पंडित शत्रुघ्न त्रिपाठी जी ने बताया, “गुरु का नक्षत्र परिवर्तन जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर है। इस दौरान धैर्य, सकारात्मक सोच और धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ाना लाभकारी होगा।”
नोट: यह समाचार ज्योतिषीय जानकारी पर आधारित है। व्यक्तिगत प्रभाव के लिए अपनी जन्म कुंडली के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह लें।















