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पत्थलगांव के सरपंचों ने भगवान परशुराम के प्रसिद्ध टांगीनाथ धाम पहुंच कर किया विस्तृत अवलोकन…


जशपुरनगर 26 सितंबर ( रमेश शर्मा )

  पत्थलगांव जनपद में सरपंच संघ के अध्यक्ष रोशन प्रताप सिंह के नेतृत्व में यंहा के सरपंचों ने झारखंड स्थित ऐतिहासिक महत्व वाला प्रसिद्ध टांगीनाथ धाम का विस्तृत अवलोकन किया। यंहा भगवान परशुराम का ऐतिहासिक महत्व वाली टांगी की पूजा अर्चना की।

पत्थलगांव जनपद के सभी सरपंचों ने विश्व स्तरीय एतिहासिक महत्व का धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए अद्भुत स्थल बताया।

सरपंच संघ के अध्यक्ष रोशन प्रताप सिंह बताया कि पड़ोसी झारखंड राज्य के गुमला जिले में स्थित एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जो भगवान परशुराम के तपस्या स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।

रोशन प्रताप सिंह ने कहा कि झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 150-166 किमी दूर, घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है,

दरअसल , स्थानीय भाषा में ‘फरसे’ को ‘टांगी’ कहा जाने के कारण इसका नाम टांगीनाथ पड़ा है।


   पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में जब श्रीराम ने सीता स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ा, तो क्रोधित परशुराम ने यहां घोर तपस्या की और अपना फरसा (कुल्हाड़ी) भूमि में गाड़ दिया। कहा जाता है कि जो भी इसे निकालने की कोशिश करता है, उसका सर्वनाश हो जाता है। यह फरसा आज भी धाम में गड़ा हुआ माना जाता है।यह स्थल भगवान शिव से भी जुड़ा है, जहां प्राचीन शिवलिंग और मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं। कभी हिंदुओं का प्रमुख तीर्थस्थल रहा यह क्षेत्र अब नक्सल प्रभावित है, लेकिन महाशिवरात्रि और अन्य त्योहारों पर श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। पुरातात्विक अवशेषों से पता चलता है कि यह प्राचीन धरोहर का खजाना है, जहां खुदाई में खजाने भी मिले हैं। प्रकृति प्रेमी और आध्यात्मिक पर्यटकों के लिए यह शांतिपूर्ण जगह है,
   पत्थलगांव जनपद से यंहा पहुंचे सरपंच संघ के अध्यक्ष रोशन प्रताप सिंह का कहना था कि “चारों ओर हरियाली से घिरा यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति दोनों का अनुभव कराता है।
समुद्र तल से 3,000 फीट ऊंचाई पर होने से यंहा सूर्योदय-सूर्यास्त का नजारा अद्भुत है।”


पर्यटक इसे “रहस्यवाद का अनोखा संगम” बताते हैं। झारखंड टूरिज्म के आधिकारिक पोस्ट में कहा गया है कि “टांगीनाथ धाम की अद्भुत नक्काशी और रहस्यमयी कहानियां देखने लायक हैं। यहां भगवान परशुराम के फरसे का प्रत्यक्ष दर्शन भी किया जा सकता है, जो इसे खास बनाता है।” एक विजिटर ने लिखा, “घने जंगलों के बीच स्थित यह धाम मनोहर वातावरण से सुसज्जित है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ ऐतिहासिक कृतियां देखने लायक हैं।”

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