रायगढ़ – स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान के तत्वाधान में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता स्वावलंबी भारत अभियान रायपुर-बिलासपुर विभाग के पूर्णकालिक प्रमुख श्री शंकर त्रिपाठी एवं प्रांत सह-समन्वयक श्री संजय चौबे रहे। कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं को नौकरी और रोजगार की चुनौतियों से निपटने के लिए स्वरोजगार व उद्यमिता अपनाने का प्रेरणादायक संदेश दिया गया।
छात्रों को मिला स्वरोजगार का मार्गदर्शन…
कार्यक्रम के दौरान अनेक युवा व्यापारियों के उदाहरण प्रस्तुत किए गए और विद्यार्थियों को उनसे सीखकर पढ़ाई के साथ-साथ स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। श्री शंकर त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “नौकरी मांगने वाला न बनकर नौकरी देने वाला बनो”। उन्होंने छात्रों को पढ़ाई के साथ स्किल्स में दक्ष बनने की सलाह दी तथा छोटे-छोटे कार्यों के जरिए कमाई के अवसरों की जानकारी दी, जिससे विद्यार्थी आत्मनिर्भर बन सकें।

कृष्ण यादव का संघर्ष एक प्रेरणा..
संजय चौबे ने अपने वक्तव्य में विशेष रूप से कृष्ण यादव जी का उदाहरण प्रस्तुत किया, जिन्होंने संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी और उद्यमिता का रास्ता चुनकर अपने जीवन को नई दिशा दी। कठिनाइयों से जूझते हुए भी उन्होंने अपने श्रम, लगन और स्वदेशी सोच के बल पर आत्मनिर्भरता हासिल की। उनका यह जीवन प्रसंग छात्रों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है कि यदि इच्छा शक्ति और साहस हो, तो सीमित संसाधनों में भी उद्यमिता को अपनाकर सफलता पाई जा सकती है।
स्थानीय उद्योग और वैश्विक चुनौतियाँ…
श्री चौबे ने आगे कहा कि विद्यार्थियों को “बड़ा सोचो, अलग सोचो और दूर की सोचो” की भावना अपनानी चाहिए। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों का उदाहरण देते हुए बताया कि चीन से आयातित झालर, पटाखे और मूर्तियों ने हमारे कुटीर उद्योग को प्रभावित किया है, वहीं अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ लगाने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ा है। इन चुनौतियों का समाधान केवल स्वदेशी अपनाने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार में निहित है।

पंच स्वदेशी प्रण और संकल्प..
कार्यक्रम के अंत में पंच स्वदेशी प्रण पर बल दिया गया, जिसमें स्वदेशी साबुन, मंजन, साफ-सफाई का सामान, वस्त्र, खान-पान एवं व्यवहार को अपनाने का आह्वान किया गया। विद्यार्थियों और शिक्षकों को स्वदेशी संकल्प दिलाया गया तथा उन्हें देसी-विदेशी वस्तुओं की सूची भी प्रदान की गई। लगभग 200 की संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं और अध्यापकों ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया।
इस सम्मेलन में कॉलेज के प्रोफेसर श्री आनंद शर्मा एवं एनएसएस प्रभारी श्री कपूरचंद गुप्ता ने भी महत्वपूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ का विशेष योगदान रहा। इस आयोजन ने छात्रों के मन में आत्मनिर्भर भारत और उद्यमिता की भावना को दृढ़ता से स्थापित किया।















