एक ओर पीएम मोदी देश भर के बच्चों से कर रहे है..”परीक्षा पर चर्चा”…और दूसरी ओर पीएम श्री स्कूल के बच्चे बोर्ड परीक्षा के प्रवेश लिए बैठे धरने पर…!!

सारंगढ़ – जिला मुख्यालय सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बीते शुक्रवार उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब पीएम श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल के कई परीक्षार्थी कलेक्टोरेट परिसर में धरने पर बैठ गए। मामला बोर्ड परीक्षा के प्रवेश पत्र (Admit Card) रोकने से जुड़ा है, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका नजर आ रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
स्कूल प्रबंधन ने 75 फीसदी से कम उपस्थिति का हवाला देते हुए कक्षा 10वीं और 12वीं के कुल 22 परीक्षार्थियों के नियमित प्रवेश पत्र जारी करने से रोक लगा दी है। स्कूल प्रशासन (प्रिंसिपल)का कहना है कि वे माध्यमिक शिक्षा मंडल के नियमों का पालन कर रहे हैं, जबकि छात्रों का तर्क कुछ और है।
कुल 32 छात्र है परंतु 22 छात्रों पर ही लगी रोक…???!!!
नाम न बताने की शर्त पर सूत्र ने बताया कि कुल 32 छात्र ऐसे हैं जिनकी उपस्थिति 75 फीसदी से कम है परंतु प्रिंसिपल साहब ने कुल 22 बच्चों को ही इसमें अयोग्य पाया है शेष 10 को अभयदान दिया गया है क्योंकि उनमें से कुछ या तो राजनीतिक रसूख रखते हैं..और कुछ ने शायद सेटिंग कर ली है..हालांकि इसकी पुष्टि तो जांच में ही हो पाएगी..इसलिए ये एक खोज का विषय है कि 10 छात्रों पर मेहरबानी क्यों…???!!!
छात्रों और अभिभावकों की मांग
धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि सत्र के दौरान विभिन्न कारणों से उनकी उपस्थिति कम रही, लेकिन अंतिम समय में प्रवेश पत्र रोकना उनके साल को बर्बाद करने जैसा है।
क्या है छात्रों का तर्क: छात्रों का कहना है कि उन्हें पहले से चेतावनी नहीं दी गई और अब परीक्षा सिर पर है।
अभिभावकों का रोष: परिजनों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन इस संवेदनशील मामले में सहानुभूति दिखाने के बजाय कड़ा रुख अपना रहा है।
प्रशासनिक दखल की उम्मीद
कलेक्टोरेट में धरने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। फिलहाल छात्रों के इस प्रदर्शन को देखते ही कलेक्टर ने डीईओ को माध्यमिक शिक्षा मंडल को पत्र देने को कहा है कि उन्हें ‘विशेष अनुमति’ के तहत परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जाए। यदि जल्द ही प्रवेश पत्र नहीं मिलते हैं, तो छात्रों का पूरा शैक्षणिक वर्ष खराब होने की आशंका है।
एक स्थानीय अभिभावक का कहना है कि –
“नियमों की अपनी जगह है, लेकिन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालना आवश्यक है।”
फिलहाल जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल के प्राचार्य एल.पी. पटेल को आदेश जारी किया कि इन सभी 22 परीक्षार्थियो का फिर से प्रायोगिक परीक्षा लिया जाये और इनकी उपस्थिति परीक्षा प्रारंभ होते तक प्रतिदिन स्कूल में नियमित रूप से किया जाये















