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हेडलाइन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में भारत की प्रगति और वैश्विक आकांक्षाओं को किया रेखांकित..

नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम (ET World Leaders Forum) को संबोधित करते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि, शासन, और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में देश की महत्वाकांक्षाओं पर प्रकाश डाला। अपने प्रेरक भाषण में, पीएम मोदी ने भारत के उज्ज्वल भविष्य और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इन मुद्दों का किया जिक्र…
आर्थिक प्रगति और सुधार..
प्रधानमंत्री ने पिछले दशक में भारत की अर्थव्यवस्था में 90% की वृद्धि का उल्लेख किया, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की 35% वृद्धि से कहीं अधिक है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सरकार के निरंतर सुधारों को दिया और कहा कि भारत विकास के पथ पर अग्रसर है। पीएम ने अपने शासन के मंत्र “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन” को रेखांकित करते हुए बताया कि इन प्रयासों ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, जिससे एक “नव-मध्यम वर्ग” का उदय हुआ है जो भारत की प्रगति का प्रेरक बल बन रहा है।
बुनियादी ढांचे और समावेशी विकास
मोदी ने हाल ही में शुरू की गईं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, जैसे वंदे भारत ट्रेनें और पुणे, ठाणे, बैंगलोर जैसे शहरों में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सभी नागरिकों के लिए जीवन को सुगम बनाना है। इसके साथ ही, उन्होंने पर्यटन को भारत के विकास का एक प्रमुख स्तंभ बताया और समावेशी वैश्विक विकास पर बल दिया,


वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
मोदी ने जी-20 प्रेसीडेंसी के दौरान ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने में भारत की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है, बल्कि वैश्विक सहयोग और नेतृत्व में भी योगदान दे रहा है।


‘विकसित भारत’ का संकल्प
अपने भाषण के समापन में, पीएम मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने नागरिकों, हितधारकों और वैश्विक समुदाय से इस यात्रा में योगदान देने का आह्वान किया, जिसमें नवाचार, समावेशिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।


फोरम में पीएम मोदी की भागीदारी को वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। उनके संबोधन ने भारत की प्रगति की कहानी को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का कार्य किया।

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