रायगढ़/नई दिल्ली | 2 फरवरी, 2026
केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के औद्योगिक हृदय स्थल, रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में लॉजिस्टिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ी सौगात दी है। रेल मंत्रालय ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के अंतर्गत बैकुंठ-उरकुरा (Baikunth-Urkura) रेल खंड के बीच चौथी रेल लाइन के निर्माण के लिए ₹426.01 करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है।
यह परियोजना ‘पीएम गतिशक्ति योजना’ के तहत स्वीकृत की गई है, जिसका उद्देश्य माल ढुलाई में लगने वाले समय और लागत को कम करना है।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य: ट्रैफिक का ‘बॉटलनेक’ खत्म करना
बिलासपुर-रायपुर-दुर्ग रेल खंड भारत के सबसे व्यस्त रेल गलियारों में से एक है। विशेष रूप से बैकुंठ और उरकुरा के बीच मौजूदा ट्रैक अपनी क्षमता से 150% अधिक बोझ पर चल रहे थे।
दूरी: यह नई चौथी लाइन लगभग 26.40 किलोमीटर लंबी होगी।
क्षमता विस्तार: नई लाइन बनने से मालगाड़ियों को ‘पैसेज’ मिलने का इंतज़ार नहीं करना होगा, जिससे यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी भी कम होगी।
रायगढ़ के उद्योगों के लिए ‘गेम चेंजर’
रायगढ़ क्षेत्र देश का प्रमुख स्टील, पावर और सीमेंट हब है। इस नई रेल लाइन का सीधा लाभ निम्नलिखित को मिलेगा:
जिंदल स्टील एंड पावर (JSPL) व अन्य: कच्चे माल (आयरन ओर और कोयला) की आपूर्ति रायगढ़ तक तेजी से पहुंचेगी।
पावर प्लांट्स: तलाईपाली और मांड-रायगढ़ कोलफील्ड्स से निकलने वाला कोयला बिना किसी देरी के पावर प्लांटों तक पहुंचाया जा सकेगा।
सीमेंट उद्योग: रायगढ़ और जांजगीर-चांपा के सीमेंट प्लांटों को देश के दक्षिणी और पश्चिमी बाजारों तक माल भेजने के लिए अतिरिक्त रैक और खाली ट्रैक उपलब्ध होंगे।
स्थानीय स्तर पर रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर
निर्माण कार्य: इस ₹426 करोड़ की परियोजना से स्थानीय ठेकेदारों, इंजीनियरों और श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
आधुनिक सिग्नलिंग: इस लाइन पर कवच (KAVACH) सुरक्षा प्रणाली और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का उपयोग किया जाएगा।
रायगढ़-भूपदेवपुर खंड का भी हुआ विस्तार
इसी कड़ी में एक और उपलब्धि यह है कि रायगढ़ के पास स्थित कोतरलिया-रायगढ़-किरोड़ीमल नगर-भूपदेवपुर (लगभग 26 किमी) के बीच भी चौथी लाइन का काम अंतिम चरण में है। हाल ही में इस पर 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल ट्रायल किया गया है।
विशेषज्ञों की राय
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई-हावड़ा मुख्य लाइन पर यह निवेश छत्तीसगढ़ को देश के “लॉजिस्टिक हब” के रूप में स्थापित करेगा। इससे न केवल उद्योगों का मुनाफा बढ़ेगा, बल्कि परिवहन सस्ता होने से अंततः उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा।















