पत्थलगांव 13 जनवरी ( रमेश शर्मा )
छत्तीसगढ़ के जशपुर वन मंडल के ज्यादातर जंगलों में हाथी तथा अन्य वन्य प्राणियों के सामने गर्मी का मौसम से पहले ही चारा पानी की समस्या गहराने लगी है। इसी वजह मुख्य सड़कों के अलावा रिहायशी इलाकों में इन दिनों 5 अलग-अलग दलों में 40 से अधिक हाथियों का विचरण से लोगों में दहशत व्याप्त है। आज बीती रात दल से भटके हुए एक हाथी ने पत्थलगांव वन परिक्षेत्र में शासकीय कृषि विज्ञान केन्द्र में पहुंच कर जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान दो लोगों ने भाग कर काफी मुश्किल से अपनी जान बचाई।
दरअसल, बीते एक महीने से जशपुर वन मंडल में लगातार इन हाथियों के हमले से बीस गांवों के लोगों में हर वक्त दहशत बनी रहती है।
तपकरा वन परिक्षेत्र में हाथी सुरक्षा अभियान के प्रभारी नन्द कुमार यादव ने बताया कि तपकरा, फरसाबहार क्षेत्र में 37 हाथियों के तीन अलग-अलग दल की मौजूदगी के बाद वन विभाग ने यंहा गंजिंयाडीह – कोल्हेनझरिया मुख्य सड़क पर वाहनों की आवा-जाही बन्द कर दी गई है।
वन विभाग की बचाव टीम को दो दिन पहले ही तपकरा मुख्य सड़क पर हाथियों के घेरे में फंसे दो बाइक सवार युवकों को बचाने में की खातिर घंटों मशक्कत करनी पड़ी थी।
इसी बात के मद्देनजर अब यंहा हाथियों से जनहानि जैसी घटनाओं को रोकने के लिए शाम चार बजे से सुबह तक वाहनों की आवा-जाही सख्ती के साथ बन्द कर दी गई है।

जशपुर वन मंडल में कई जगह हाथियों से सतर्क करने की खातिर मुख्य सड़कों तथा वन मार्गं पर भी सतर्कता बरतने की कड़ी हिदायत के साथ बेरियर लगा दिए गए हैं।
इसी तरह पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के तमता, सुसडेगा, बालाझार सहित 20 गांवों में हाथियों ने महज चार दिन में 10 ग्रामीणों के घरों को क्षतिग्रस्त कर उन्हें कड़कड़ाती ठंड में बेघर कर दिया है।

पत्थलगांव जनपद में सरपंच संघ के अध्यक्ष रोशन प्रताप सिंह का कहना है कि यंहा हाथियों के लिए ज्यादातर जंगलों में चारा पानी की कमी की वजह से ये वन्य प्राणी भोजन की तलाश में बार बार समीप के आबादी वाले गांवों में पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह मुख्य सड़क और गांवों में हाथियों का लगातार विचरण की समस्या बढ़ गई है।















