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राज्योत्सव से पहले ही पत्थलगांव को जिला बनाने की वर्षों पुरानी मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ा



पत्थलगांव 27 अगस्त (रमेश शर्मा)

    छत्तीसगढ़ में राज्योत्सव से पहले ही पत्थलगांव को जिला बनाने की वर्षों पुरानी मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। पत्थलगांव क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि हमारे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी ने यंहा नगर पंचायत को नगर पालिका का दर्जा देकर विकास की शुरुआत कर दी है लेकिन इस बार के राज्योत्सव के इसे नये जिले का दर्जा दे देना चाहिए।

दरअसल,पत्थलगांव जशपुर जिले का एक प्रमुख तहसील और नगर पालिका है, जो सरगुजा संभाग के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है और यहां की जनसंख्या लगभग 1.5 लाख से अधिक है।

    जिला भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष सुनील अग्रवाल का कहना है कि पत्थलगांव को अलग जिला बनाने की मांग कई वर्षों पुरानी है, जो मुख्य रूप से प्रशासनिक सुविधाओं, विकास और स्थानीय लोगों की पहुंच को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाई जाती रही है।
      सुनील अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कुल 33 जिले हैं, लेकिन पत्थलगांव जैसे क्षेत्रों के लिए नया जिला बनाने की मांगें समय-समय पर उठती रहती हैं।

प्रशासनिक दूरी और असुविधा

पत्थलगांव में गुरुद्वारा गुरु सिंग सभा के अध्यक्ष सरदार हरजीत सिंह भाटिया का कहना है कि  पत्थलगांव जशपुर जिले का हिस्सा है, लेकिन जिला मुख्यालय जशपुर से इसकी दूरी लगभग 110 किलोमीटर है। खराब सड़कों के कारण यहां के निवासियों को सरकारी कार्यों (जैसे दस्तावेज सत्यापन, न्यायिक कार्य या स्वास्थ्य सेवाएं) के लिए 5-6 घंटे लग जाते हैं। पहले यह रायगढ़ जिले का हिस्सा था, जहां दूरी 105 किमी थी, लेकिन अब भी समस्या बरकरार है। स्थानीय लोग मानते हैं कि अलग जिला बनने से प्रशासनिक सेवाएं नजदीकी होंगी, जिससे विकास तेज होगा।

आर्थिक और सामाजिक विकास
पत्थलगांव जनपद में सरपंच संघ के अध्यक्ष रोशन प्रताप सिंह का कहना है कि क्षेत्र में कृषि, वन उत्पाद और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां के लोग धान, मक्का और आदिवासी उत्पादों पर निर्भर हैं। अलग जिला बनने से स्थानीय स्तर पर उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार संभव होगा। उन्होंने कहा कि सर्व आदिवासी समुदाय ने भी विशेष रूप से इस मांग को बड़ी रैली निकाल कर पुरजोर तरीके से उठाया है, छत्तीसगढ़ में टमाटर की बहुतायत में फसल लेने की अलग पहचान के बाद भी यह क्षेत्र विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ है।

राजनीतिक समर्थन:
भारतीय जनता पार्टी के ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे सक्रिय नेता अवधेश गुप्ता, अनिल मित्तल का कहना था कि पत्थलगांव को जिला बनाने की खातिर सभी राजनीतिक दल के लोग एक जुट हैं। आदिवासी बहुल इलाकों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की भाजपा सरकार को यह तोहफा देना ही चाहिए।
   यह मांग लम्बे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा समर्थित रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में कई बार ज्ञापन सौंपे गए और रैलियां निकाली गईं। नवनिर्वाचित विधायक गोमती साय ने भी 2023 में सरकार बनते ही इसकी मांग उठाई। वर्तमान भाजपा सरकार में भी स्थानीय विधायक और मंत्री इस मुद्दे पर सक्रिय हैं।

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