रमेश शर्मा

50 सालों का सफर ख़बरों के साथ...✒️

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हेडलाइन

इंसानों से ज्यादा जज्बात और ममता हाथियों में होती है… साक्षात् उदाहरण देखना हो तो चलें घरघोड़ा तमनार के जंगलों में…


नितेश शर्मा…की खास रिपोर्ट


रायगढ़ 03 दिसंबर – जी हां हम सही कह रहे हैं….आजकल इंसानों से ज्यादा जज्बाती और मातृत्व प्रेम हाथियों में देखने को मिल रहा है!!!

                       या यूं कहें कि जानवरों ने इस मामले में इंसानों को पीछे छोड़ दिया है तो कोई गलत बात नहीं होगी इसका ताजा उदाहरण पिछले दिनों गौरमुडी के पास तालाब में डूबकर एक नन्हे शावक की मौत हो गई थी जिसे वन विभाग द्वारा पोस्टमार्टम के पश्चात् दफना दिया गया था परंतु हाथियों के दल ने उक्त गुमशुदा शावक को खोजने में दिनरात एक कर दिया है ग्रामीणों का कहना है कि उस दिन से हाथियों ने तालाब के पास डेरा डाल दिया था और करीब तीन चार दिनों तक गुमशुदा शावक की खोज में इधर उधर घूमते हुए तबाही मचा रहे थे बमुश्किल वन विभाग की सहायत से उन्हें जंगल की तरफ भेजा गया है उसके बाद ही गांव में शांति का माहौल है उससे पहले ग्रामीण रतजगा कर रहे थे पास के उद्योगों की सहायता से गांव में बड़े बड़े हेलोजन बल्ब से रोशनी फैलाई जा रही है जिससे कि हाथी गांव में घुसकर तोड़फोड़  न मचा सकें वन विभाग के कर्मचारी भी हाथियों की निगरानी लगातार कर रहे हैं और उन्हें जंगलों में खदेड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

सूंड में शावक का शव लेकर घूमती मादा हथिनी (फाइल फोटो)

इस घटनाक्रम का एक पहलू यह भी है कि हाथियों में मातृत्व प्रेम इंसानों से ज्यादा है तभी रिश्तों को भूल जाने वाले इंसानों को आजकल जानवरों से सीखना चाहिए कि कैसे किसी रिश्ते की ममता और बंधन के प्रति समर्पण और अपनत्व का भाव रखा जाता है।

तालाब के पास गुमशुदा शावक की तलाश में व्याकुल मादा हथिनी और उसका समूह

एक मां अपने शावक के विरह में किस तरह व्याकुल है और उसका दल उसके साथ पूरे समर्पित भाव से लगा हुआ है ये हम सबके लिए एक प्रेरक घटना है, यही नहीं पूर्व में भी कई वर्षों पहले एक नन्हे शावक की मौत पर उसकी मां हथिनी के द्वारा उसके शव को सूंड में उठाकर कई दिनों तक घूमने की घटना भी चर्चित हुई थी और आज इस घटना से भी जानवरों ने फिर से अपनत्व के प्रेम और समर्पण आपसी तालमेल का पाठ इंसानों को सिखाने की कोशिश की हैं।

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