हल्द्वानी 28 सितंबर (रमेश शर्मा)
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का धारचूला एक आकर्षक पर्यटन स्थल है, जो भारत-नेपाल सीमा पर काली नदी के किनारे बसा हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने यंहा 12 अक्टूबर 2023 को पहुंचकर आदि कैलाश चोटी के दर्शन किये थे। उन्होंने वहाँ पार्वती कुंड मंदिर में पूजा-अर्चना की और हेलीपैड का उद्घाटन किया था। इसके बाद यंहा अब देश के कोने-कोने से पर्यटकों की भीड़ पहुंचने लगी है।
हल्द्वानी के सेवानिवृत्त दूरसंचार विभाग के अधिकारी रजनीकांत शर्मा ने बताया कि यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक महत्व और साहसिक यात्राओं के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से लगभग 15 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन प्राचीन व्यापार मार्ग पर स्थित है, जहाँ से हिमालय की चोटियाँ और नदी का विहंगम दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की इस महत्वपूर्ण यात्रा के बाद यंहा जगह जगह विकास कार्यों की शुरुआत हो चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी जी की यह यात्रा धार्मिक, सांस्कृतिक और विकासपरक उद्देश्यों से प्रेरित थी, जिसमें उन्होंने आदि कैलाश यात्रा का उद्घाटन और हेलीकॉप्टर यात्रा की। यह यात्रा धारचूला के निकट व्यास घाटी (काली नदी के किनारे) से शुरू हुई, जो हिमालयी त्रिकोण का हिस्सा है। आदि कैलाश शिव का प्रतीक माना जाता है, और यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आसान बनाने के लिए शुरू की गई।

रजनीकांत शर्मा ने बताया कि धारचूला का नाम ‘धार’ (चोटी) और ‘चूला’ (चूल्हा) शब्दों से मिलकर बना है, क्योंकि इसका आकार चूल्हे जैसा प्रतीत होता है। यहाँ नेपाल का धारचूला शहर ठीक सामने काली नदी के पार स्थित है, जो सीमा व्यापार का केंद्र भी है।

उन्होंने बताया कि धारचूला की प्रमुख विशेषताओं में यंहा का अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य है । जिसको देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यंहा दूर दूर तक फैले घने जंगल, काली नदी का कलकल प्रवाह, और हिमालयी चोटियों का नजदीकी दृश्य इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श बनाता है।
वसंत और ग्रीष्म में फूलों की बहार और शरद में रंग-बिरंगे पहाड़ इसे ‘छोटा कश्मीर’ जैसा बनाते हैं।

धार्मिक महत्व में यहां कालिका (काली माता) का प्रमुख तीर्थस्थल है। काली मंदिर में दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। पास ही व्यास घाटी में आदि कैलाश, ओम पर्वत और व्यास गुफा स्थित हैं, जहाँ महर्षि व्यास की तपस्या की मान्यता है। छिपला केदार यात्रा भी यहाँ से शुरू होती है।
साहसिक गतिविधियों के लिए यंहा ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग (काली नदी पर) और बॉर्डर वॉकिंग। व्यास घाटी ट्रेक (ओम पर्वत तक) में 150 वर्ष पुराने नक्काशीदार घरों और दुर्लभ जड़ी-बूटियों का आनंद लिया जा सकता है।

















