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हेडलाइन

सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि दिव्य ऊर्जा के धरती पर अवतरण, बुराई पर अच्छाई की विजय, और आत्मिक शुद्धि का महापर्व है देव दीपावली – आचार्य शत्रुघ्न त्रिपाठी…

वाराणसी 05 नवंबर – धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को देव दीपावली का भव्य आयोजन हुआ। गंगा के चौरासी (84) घाटों पर एक साथ 25 लाख से अधिक दीपों की लौ प्रज्वलित हुई, जिससे पूरा तट अलौकिक और स्वर्गिक आभा से जगमगा उठा। इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक वाराणसी पहुंचे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमो घाट पर पहला दीप जलाकर इस भव्य महोत्सव का शुभारंभ किया। इसके बाद 84 घाटों पर दीपमालाएं सज उठीं, मानो तारे ज़मीन पर उतर आए हों।

लेजर शो और आतिशबाजी: चेतसिंह घाट पर ‘काशी-कथा’ पर आधारित 25 मिनट का थ्री-डी प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा, भव्य आतिशबाजी भी की गई जिसने आसमान को रंगीन रोशनी से भर दिया।
राष्ट्रीयता का संदेश: दशाश्वमेध घाट पर ‘अमर जवान ज्योति’ की अनुकृति स्थापित कर कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इस बार का देव दीपावली महोत्सव ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को समर्पित था, जो देश की वीर माताओं के आंचल को नमन करता है।

बनारस हिंदू विश्व विद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष आचार्य श्री शत्रुघ्न त्रिपाठी जी ने इस देव दीपावली का आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि देवताओं का धरती पर अवतरण और प्रकाश की विजय का प्रतीक है देव दीपावली, जिसे ‘देवताओं की दिवाली’ भी कहा जाता है, कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और इसका आध्यात्मिक एवं पौराणिक महत्व अत्यंत गहरा है।
1. त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की विजय
* पौराणिक कथा: सबसे प्रमुख मान्यता यह है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक महाबलशाली असुर का वध किया था, जिसने अपनी शक्ति से तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) को आतंकित कर रखा था।
* विजय का उत्सव: इस विजय से सभी देवी-देवता अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने काशी (वाराणसी) में आकर दीप जलाकर उत्सव मनाया। इसलिए यह पर्व अंधकार (अज्ञान/असुर शक्ति) पर प्रकाश (ज्ञान/दिव्य शक्ति) की विजय का प्रतीक है। भगवान शिव को इसी कारण त्रिपुरारी भी कहा जाता है।
2. देवताओं का काशी में आगमन
* मान्यता: ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा की इस पवित्र रात्रि को सभी देवी-देवता धरती पर आते हैं और वे स्वयं काशी के गंगा घाटों पर स्नान (कार्तिक स्नान) और दीप दान करते हैं।
* दिव्य उपस्थिति: श्रद्धालुओं के लिए यह दिन दिव्य उपस्थिति का अनुभव करने और देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर होता है, जिसके कारण काशी की दिव्यता कई गुना बढ़ जाती है।


3. कार्तिक स्नान और दीप दान का महत्व
* पुण्य की प्राप्ति: देव दीपावली के दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने (जिसे कार्तिक स्नान भी कहते हैं) और दीप दान करने का विशेष धार्मिक महत्व है।
* मोक्ष और शांति: मान्यता है कि ऐसा करने से भक्त को पापों से मुक्ति मिलती है, पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष प्राप्त होता है, और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
4. सकारात्मक ऊर्जा का संचार
* लाखों दीपों की रोशनी न केवल घाटों को जगमगाती है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और अज्ञानता के अंधकार को दूर करने का संदेश देती है।
* यह पर्व हमें पवित्रता, भक्ति और आध्यात्मिक जागृति की ओर प्रेरित करता है।

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