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हेडलाइन

“ज्योतिष और वास्तु केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने की वैज्ञानिक कला भी है ; डॉ.शत्रुघन त्रिपाठी

*इंदौर 19 अक्टूबर ( रमेश शर्मा )*
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी के संस्कृतविद्या धर्मविज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शत्रुघ्न त्रिपाठी का कहना है कि “ज्योतिष और वास्तु केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने की वैज्ञानिक कला भी हैं।


ज्योतिष शास्त्र के क्षेत्र में राष्ट्रपति सम्मान से पुरस्कृत डा.त्रिपाठी वैदिक ज्योतिष, फलित ज्योतिष तथा सम्बन्धित शास्त्रीय विषयों के विशेषज्ञ भी हैं।उनकी अगुवाई में इंदौर में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय ज्योतिष एवं वास्तु सम्मेलन सम्पन्न हुआ।
  इस सम्मेलन में देश विदेश से लगभग ५०० प्रतिभागियों ने  शिरकत की। जिसमें जापान, यूरोप, और अमेरिका के विद्वान शामिल थे,  इस आयोजन में ज्योतिष और वास्तु को आधुनिक विज्ञान और जीवनशैली के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने पर जोर दिया गया।
    माँ शारदा ज्योतिष धाम के निदेशक ने इस आयोजन को वैश्विक मंच पर भारतीय ज्ञान परंपरा को स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक बताया। इस सम्मेलन में अनेक विद्वानों का सम्मान भी किया गया। यह सम्मेलन ज्योतिष और वास्तु के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने में भी सफल रहा। 

ज्योतिष विज्ञान के सम्मेलन में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि ज्योतिष मानव जीवन को समय, ग्रहों और नक्षत्रों के आधार पर दिशा प्रदान करता है, जबकि वास्तु पर्यावरण और निवास स्थान की ऊर्जा को संतुलित कर समृद्धि लाता है। दोनों विज्ञान जीवन को व्यवस्थित और समन्वित बनाने में महत्वपूर्ण हैं। 


यंहा ज्योतिष के विद्वानों ने ज्योतिष अन्तर्गत चिकित्सा, कृषि, और सामाजिक अनुप्रयोगों पर भी गहन विचार-विमर्श किया। वास्तु में पर्यावरणीय स्थिरता और आधुनिक वास्तुकला के साथ तालमेल पर विशेष जोर रहा।  ज्योतिष मुहूर्त चयन, कुंडली विश्लेषण, और वास्तु दोष निवारण पर कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। ज्योतिषाचार्य डॉ. त्रिपाठी को २० वर्षों से अधिक का शिक्षण अनुभव के साथ वे ज्योतिष के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का संचालन करते हैं, जिसमें फलित ज्योतिष, गणित ज्योतिष एवं मुहूर्त विज्ञान शामिल हैं। इस सम्मेलन में उनकी दो पुस्तकों का भी विमोचन किया गया। इन महत्वपूर्ण पुस्तकों को डा.त्रिपाठी ने २०२०-२१ के कोरोना काल में लिखा है

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