अंकित गोरख की खास रिपोर्ट…

रायगढ़, 29 मई- मानसून की आहट के साथ ही रायगढ़ शहर के बाहरी इलाकों में रेत माफिया एक बार फिर बेखौफ होकर सक्रिय हो गए हैं।
एनजीटी के नियमों और सरकारी आदेशों को ताक पर रखकर शहर के आस-पास के नदी-नालों का सीना छलनी किया जा रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी रॉयल्टी और वैध अनुमति के, दिन-रात धड़ल्ले से अवैध रेत उत्खनन का यह काला कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन खनिज विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है..???
बारिश में ‘ब्लैक’ में बेचने की बड़ी साजिश
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रेत माफिया इस समय भारी मात्रा में रेत निकालकर शहर के बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अलग-अलग सुनसान इलाकों में डंप कर रहे हैं। इस बेतहाशा डंपिंग के पीछे एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी है। दरअसल, बारिश के दिनों में नदियों में पानी बढ़ने के कारण रेत निकालने पर पूरी तरह प्रतिबंध लग जाता है, जिससे बाजार में रेत की किल्लत हो जाती है। इसी का फायदा उठाने के लिए माफिया अभी से स्टॉक जमा कर रहे हैं, ताकि आगामी महीनों में आम जनता को मनचाहे और औने-पौने (मनमाने) दामों पर रेत बेचकर मोटी कमाई की जा सके।
रॉयल्टी को चूना, पर्यावरण को भारी नुकसान
बिना रायल्टी पर्ची के चल रहे इस खेल से एक तरफ जहां शासन को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंधाधुंध उत्खनन से नदी-नालों का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है। इससे भू-जल स्तर गिरने और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होने का खतरा मंडराने लगा है। भारी-भरकम हाइवा और ट्रैक्टरों के अवैध परिवहन से ग्रामीण सड़कें भी जर्जर हो रही हैं।













