नई दिल्ली . 28 मई ( रमेश शर्मा )
जनजातीय सुरक्षा मंच के नेतृत्व में देश के विभिन्न क्षेत्रों मे वर्ष 2006 से चल रहा आंदोलन की जानकारी के साथ आज पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा. इस दौरान विभिन्न हिस्सों से पहुंचे जनजाति प्रतिनिधित्व कर रहे नेता भी उपस्थित थे। गणेश राम भगत ने राष्ट्रपति से भेंट कर उन्हें एक आदिवासी प्रतीक चिन्ह भेंट किया। राष्ट्रपति ने इस दौरान पुरानी बातों को लेकर भी छत्तीसगढ़ को याद किया।

विदित हो कि जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत के नेतृत्व में पूरे देश में धर्मांतरित लोगों को जनजाति सूची से बाहर करने की मांग निरंतर चल रही थी इस डीलिस्टिंग आंदोलन के साथ छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों का भारी समर्थन रहा।

जशपुर जिले के युवा नेता रोशन प्रताप सिंह, रामप्रकाश पांडेय ने बताया कि इसी के तहत 24 मई को दिल्ली के लाल किला मैदान में ऐतिहासिक जनजाति सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया गया जिसमें देश भर के 500 से भी अधिक जनजाति के लगभग 2 लाख लोग उपस्थित हुए थे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गृह मंत्री अमित शाह ने इसे जनजातीय कुंभ की संज्ञा देते हुए कहा था कि गणेश राम भगत के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद सदी का सबसे बड़ा आंदोलन है । इसके पश्चात मंच के प्रतिनिधि मंडल ने आज गणेश राम भगत के नेतृत्व में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मिला ,इस अवसर पर गणेश राम भगत ने महामहिम को अपना परिचय देते हुए कहा मैं गणेश राम भगत तब महामहिम ने स्वय छत्तीसगढ़ कहते हुए पुरानी बातों के साथ उन्हें याद दिया ।
इस अवसर पर गणेश राम भगत के साथ देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल थे इस अवसर पर महामहिम को उड़ीसा का पारंपरिक गमछा के साथ ज्ञापन सौंपा गया ।













