रमेश शर्मा

50 सालों का सफर ख़बरों के साथ...✒️

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हेडलाइन

बिसात और किताब का मेल: शतरंज और परीक्षा के बीच ‘परफेक्ट बैलेंस’ ही है सफलता की कुंजी….क्या कहती है एग्जाम एक्सपर्ट श्वेता राय!!!

परीक्षा की तैयारियों के लिए पढ़ें.. आगे क्या बताया ….एक्सपर्ट “श्वेता राय” ने..!!!
कैसे करें एग्जाम का सरलता से सामना…..!!!

विद्यार्थियों के लिए ‘स्मार्ट बैलेंस’ टिप्स एक आदर्श संतुलन बनाने के लिए विशेषज्ञ इन सुझावों पर देते हैं जोर..!!!

अक्सर माता-पिता को लगता है कि खेल और पढ़ाई दो अलग दिशाएं हैं, लेकिन आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञान एक नया नजरिया पेश कर रहा है। शतरंज और परीक्षा की तैयारी के बीच का संतुलन (Balance) न केवल छात्र का तनाव कम करता है, बल्कि उसके ‘परफॉरमेंस’ को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

संतुलन ही शक्ति है: – क्यों जरूरी है यह तालमेल???

अत्यधिक पढ़ाई अक्सर ‘बर्नआउट’ (मानसिक थकान) का कारण बनती है। यहाँ शतरंज एक ‘एक्टिव रिलैक्सेशन’ की भूमिका निभाता है:
ब्रेन रिफ्रेशर:  8 घंटे की पढ़ाई के बाद दिमाग सुस्त होने लगता है। शतरंज की एक बाजी मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को फिर से सक्रिय कर देती है, जिससे दोबारा पढ़ाई शुरू करने पर एकाग्रता (Concentration) बढ़ जाती है।

रणनीति का हस्तांतरण (Skill Transfer): जो छात्र शतरंज की बिसात पर ‘अगली 5 चालें’ सोचना सीख जाता है, वह परीक्षा के कठिन प्रश्न पत्र को भी एक रणनीति के तहत हल करना सीख लेता है।


अनुशासन का गणित: शतरंज सिखाता है कि समय सीमित है। यही सीख परीक्षा हॉल में ‘टाइम मैनेजमेंट’ के रूप में काम आती है।

नियम 90:20: 90 मिनट की गहन पढ़ाई के बाद 20 मिनट का शतरंज ब्रेक लें। यह मोबाइल स्क्रॉलिंग से कहीं बेहतर है क्योंकि यह दिमाग को सुस्त नहीं, बल्कि चुस्त बनाता है।

स्ट्रेस बस्टर: परीक्षा से ठीक एक रात पहले जब घबराहट बढ़े, तो 15 मिनट का ‘लाइट चेस गेम’ खेलें। यह आपके तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करने में मदद करता है।

हार से सीखना: शतरंज की हार छात्र को यह सिखाती है कि परीक्षा का एक खराब मॉक टेस्ट अंत नहीं, बल्कि सुधार का मौका है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ..
आत्मानंद विद्यालय में व्याख्याता के पद पर कार्य कर चुकी व निवेश के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त करने हेतु फाइनेंशियल प्लानिंग के क्षेत्र में विख्यात एवं प्रतिष्ठित स्टॉक्स एन सिप्स की संस्थापिका श्रीमती श्वेता राय ने बताया कि उन्होंने भी अपने छात्र जीवन में शतरंज को अपनी सफलता की कुंजी समझकर अपनाया और इसके परिणाम स्वरूप उनकी एकाग्रता बढ़ी और स्ट्रेस से मुक्ति मिली जिससे उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं अध्ययन के साथ सही समय पर सही निवेश की प्लानिंग के निर्णय लेने में और व्यक्तिगत के के साथ साथ पेशेवर जीवन में काफी मदद मिली है,और शायद वे इसी कारण वे आज इस जगह पर पहुंची है और यही नहीं शतरंज के खेल के क्षेत्र में भी वे अपनी पहचान बना चुकी हैं.इसलिए परीक्षा की तैयारियों के बीच उनका युवाओं से कहना है कि…
                        

                      “जीवन और परीक्षा दोनों ही शतरंज की तरह हैं। यदि आप केवल ‘किताब’ पढ़ेंगे तो ज्ञान मिलेगा, लेकिन यदि आप साथ में ‘बिसात’ पर दिमाग लगाएंगे तो उस ज्ञान को सही समय पर इस्तेमाल करने की कला आएगी।”

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