राजकाज न्यूज के लिए अंकित गोरख की खास रिपोर्ट… कर्मचारियों पर रहता है सेल्स टारगेट पूरा करने का दबाव इसी प्रेशर में होते है घपले और गलत सेल्स…ग्राहकों को भुगतना पड़ता है खामियाजा..और तो और महिला कर्मचारियों के साथ भी हो रहा दुर्व्यवहार एवं शोषण…आखिर कब तक..!! अपराध करो…इस्तीफा दो… और कर लो दूसरी नौकरी… चल रहा है यही खेल…!!! रायगढ़ – जैसा कि देखा गया है रायगढ़ जिला अपने प्रदेश में सबसे ज्यादा भू अर्जन एवम नए प्रोजेक्ट आने के कारण औद्योगिक विकास से प्रभावित हुआ है और वर्तमान में भी हो रहा है। चाहे रेल परियोजना हो या खदान परियोजना पिछले कुछ वर्षों में काफी बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया गया है। एनटीपीसी प्लांट एवं खदान, अदानी,गुजरात पावर, महाजेंको, एसईसीएल, जिंदल,हिंडाल्को आदि कई बड़े औद्योगिक घरानों के उद्योग एवं खदानें यहां खुली हैं जिसमे कई सौ एकड़ जमीन किसानों से लेकर इन्हे भू अर्जन के रास्ते दी गई है, कुछ परियोजनाओं में तो बड़े घोटाले भी सामने आए है जिन पर बात करना अभी उचित नहीं होगा जिसकी चर्चा खूब मीडिया में हो चुकी है, परंतु एक ऐसा सुनियोजित षडयंत्र कहें या घोटाला जिस पर किसी का ध्यान आकृष्ट नही हुआ है वो है बैंकों की जमा राशि का सुनियोजित बंदरबाट जिस पर चुपचाप किनारे के रास्ते से अपनी जरूरतें पूरी करके स्थानीय भू अर्जन अधिकारियों ने पिछले कई वर्षों में जमकर मलाई मारने का काम किया है। नाम न छापने की शर्त पर स्थानीय तहसील कार्यालय एवम कलेक्टर कार्यालय के एक पुराने जानकार ने बताया कि घरघोड़ा, लैलूंगा,तमनार पुसौर, और धरमजयगढ़ विकासखंड के अंतर्गत होने वाले भू अर्जन और मुआवजे की राशि के वितरण में खासकर घरघोडा और धरमजयगढ़ के भू अर्जन अधिकारियों की मिलीभगत से अनेक निजी बैंकों की शाखाओं में खाते खोलकर उनमें भारी भरकम राशि जमा की जाती है तथा हितग्राहियों को कार्यालय के चक्कर कटवाए जाते है जिससे कि जमा राशि पर निजी बैंकों को लाभ मिल सके तथा अधिकारियों की जी हुजूरी में तैनात ये निजी बैंकों के कर्मचारी अपनी नौकरी भी बचा सकें या प्रमोशन पा सकें। हद तो तब हो जाती है जब उस बैंक में खाता खोलकर भारी भरकम राशि जो की कई करोड़ों में है दे दी जाती है जिसकी शाखा ही इस विकासखंड में नही है वरन जिला मुख्यालय में रायगढ़ में केवल एक ही शाखा से काम चलाया जा रहा है। शायद इन बैंकों के अफसरान ने बड़ी बोली और ज्यादा खिदमतगरी करने में महारत हासिल है शायद इसी वजह से अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर इन बिना शाखा की निजी बैंकों में खाते खोलकर उनमें बड़ी रकम रखते हैं और पूछताछ होने पर पूर्ववर्ती खाते होने का हवाला देते है और ठीकरा पुराने अधिकारी कर्मचारियों पर फोड़ देते हैं। देखा जाए तो घरघोड़ा तमनार पुसौर धरमजयगढ़ आदि सभी जगहों पर शासकीय एवं निजी क्षेत्र के कई बैंक की शाखाएं भी हैं पर शायद इनकी बोली कम लगने के कारण ये दौड़ से बाहर हो जाते है। बहरहाल गंदा है पर धंधा है की तर्ज पर ये बैंकिंग जैसे एक साफ सुथरे पेशे को भी सौदेबाजी करके इसे दूषित करने का काम कुछ कतिपय बाहुबली बैंक अधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है। शायद इन्हें भी ऊपर से संरक्षण प्राप्त हुआ हो..ये बात शायद कोई न जान पाए पर जो भी हो ये सुनियोजित तरीके से इस प्रकार के कृत्य करके जनता एवम हितग्राहियों को परेशान करना शायद सिस्टम का एक हिस्सा बन चुका है। पता सबको है पर कोई कुछ नही कहता और कुछ नही करता है। ये जनता भी सब कुछ समझती है और चुपचाप देखती है क्योंकि ये ग्रामीण बेचारे सीधे सादे होते हैं।इनको भुगतान के समय रायगढ़ की निजी बैंकों के चेक जारी करके कार्यालय के कर्मचारी इनका विवरण इन बैंकों के दलालनुमा कर्मचारियों को दे देते हैं और गिद्ध की तरह ये भी इन ग्रामीणों के गांव घर आदि पर मंडराकार इन रुपयों को अपने बैंक में खाता खोलकर बड़े सपने दिखाकर राशि को जमा करवा कर अपना प्रमोशन पक्का कर लेते है और ठगी के शिकार ये ग्रामीण चक्कर लगाता रहते है इनके बैंकों के या तहसील कार्यालय के पर हासिल पाई शून्य ही रह जाती है। सुमडी में चल रहे इस मायाजाल को सुधारने का प्रयास जिला स्तर पर खासकर कलेक्टर महोदय को करना होगा जिससे हितग्राहियों की वित्तीय सुरक्षा हो और इस बंदरबाट पर रोक लगे। किसी ने बड़ी अच्छी कहावत भी कही है जो इस पर फिट होती है…जब सैयां भए कोतवाल तब डर काहे का…
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