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हेडलाइन

शिक्षा विभाग की सख्ती: निजी स्कूलों को चेतावनी,अब मनमर्जी की दुकानों से सामान खरीदने का दबाव नहीं..!!क्या..खुले बाजार में यूनिफार्म और किताबें उपलब्ध करा पाएंगे अधिकारी…??

क्या समाप्त होगा ये विभाग और शिक्षा माफिया की सांठगांठ का संगठित खेल..??? ठगे जा रहे अभिभावक….खानापूर्ति हुई शुरू…या वास्तव में होगा समाधान…!!!!

क्या सचमुच अभिभावक शहर की किसी भी दुकान से खरीद सकेंगे किताबें या यूनिफार्म..या ये जुमला महज एक छलावा ही साबित होगा..!!!

अंकित गोरख की खास रिपोर्ट….


रायगढ़ 25 फरवरी – शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कड़ा रुख अख्तियार किया है। विभाग ने शहर के सभी निजी स्कूलों के संचालकों की बैठक बुलाकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी छात्र या अभिभावक को किसी विशेष दुकान से ही किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं करेंगे।


अभिभावकों की जेब पर ‘डाका’ डालने की कोशिशों पर रोक
अक्सर देखा जाता है कि शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही निजी स्कूल कुछ खास विक्रेताओं के साथ साठगांठ कर लेते हैं, जिससे अभिभावकों को बाजार दर से कहीं अधिक कीमतों पर सामग्री खरीदनी पड़ती है। शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा है कि यदि कोई स्कूल किसी खास दुकान का नाम सुझाता है या दबाव बनाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को महत्वपूर्ण सुझाव
शिक्षा विशेषज्ञों और अधिकांश अभिभावको का मानना है कि केवल स्कूलों पर लगाम कसना पर्याप्त नहीं है। इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
पुस्तक विक्रेताओं व कपड़ा व्यवसायियों के साथ बैठक: DEO को जिले के प्रमुख पुस्तक विक्रेताओं और यूनिफॉर्म विक्रेताओं की बैठक बुलानी चाहिए।
खुले बाजार में उपलब्धता: यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी निजी स्कूलों की किताबें और यूनिफॉर्म शहर की किसी भी सामान्य दुकान पर उपलब्ध हों।
एकाधिकार का अंत: जब सामग्री हर जगह उपलब्ध होगी, तो प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतों में कमी आएगी और अभिभावकों को लूट से बचाया जा सकेगा।
अभिभावकों के लिए राहत की उम्मीद
विभाग के इस कदम से उन अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो हर साल बढ़ती फीस और महंगी स्टेशनरी के बोझ तले दबे रहते हैं। विभाग ने स्कूलों को निर्देश का सख्त पालन करने को कह दिया है, जिस पर शिकायत मिलने पर अभिभावक अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और  किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर मान्यता रद्द होने की कार्यवाही की बात कही गई है।

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